-नई व्यवस्था के तहत हाई-रिस्क गर्भवतियों को मिलेगा बेहतर इलाज
-जिले में 28 पीएचसी हैं संचालित, गर्भवती महिलाओं को नहीं लगानी लंबी दौड़
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में हाई रिस्क गर्भवतियों को अब बेहतर इलाज किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक पीएचसी पर एनीमिया कक्ष की स्थापना की जाएगी। अभी तक खून की कमी या अन्य जटिलताओं के मामले में गर्भवतियों को जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज की ओर दौड़ लगानी पड़ती थी। इसमें समय व रुपये दोनों की बर्बादी होती थी।
जिले में वर्तमान में कुल 28 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इसमें संस्थागत प्रसव की व्यवस्था पहले से है लेकिन हाई-रिस्क गर्भवतियों के लिए पर्याप्त प्रबंधन नहीं था। खून की कमी, उच्च रक्तचाप, शुगर या अन्य जटिलताओं की स्थिति में मरीजों को जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज भेजना पड़ता था। इससे न केवल गर्भवती महिलाओं को आने-जाने में परेशानी होती थी बल्कि कई बार विलंब के कारण उनकी स्थिति गंभीर भी हो जाती थी।
शासन के निर्देश पर अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रत्येक पीएचसी पर एनीमिया कक्ष की स्थापना की जाएगी। जहां हाई-रिस्क श्रेणी में आने वाली गर्भवतियों को तत्काल जांच और उपचार की सुविधा दी जाएगी। इस व्यवस्था के बाद डॉक्टर स्थानीय स्तर पर ही खून की जांच, आवश्यक दवाओं की आपूर्ति और आवश्यकतानुसार आयरन या अन्य जरूरी उपचार तुरंत कर सकेंगे।
माह में दो बार मनाया जाता है एचआरपी डे
सीएमओ बृजेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि हर महीने दो बार एचआरपी (हाई रिस्क प्रिगनेंसी) डे मनाया जाता है। इस दिन गर्भवतियों की जांच की जाती है। औसतन प्रत्येक केंद्र पर 20 से 25 गर्भवती जांच के लिए आती हैं। इनमें से कई महिलाएं खून की कमी या अन्य कारणों से हाई-रिस्क की श्रेणी में आती हैं। पहले इन मरीजों का उपचार जिला अस्पताल में ही संभव था लेकिन अब एनीमिया कक्ष बनने से गर्भवती महिलाओं को इलाज मिल सकेगा।