मुख्यमंत्री के जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बना जिला अस्पताल वर्तमान में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण रेफर सेंटर बन कर रह गया है। मरीज की हालत जरा सी भी सीरियस हुई तो डाक्टर बिना देरी किए पीजीआई सैफई के लिए रेफर कर देेते है।
मौसम में परिवर्तन के कारण इन दिनों बच्चे वायरल की चपेट में है और जिले में बालरोग विशेषज्ञ के सभी 9 पद खाली पडे़ हैं। अभी तक इकलौते बालरोग विशेषज्ञ रहे डॉ. नरेंद्र सिंह का भी तबादला कर दिया गया है। जिला अस्पताल में रोज करीब 1100 मरीज आते हैं।
इनमें से दो सौ के आसपास दस साल तक के बच्चे होते है। अस्पताल में बालरोग विशेषज्ञ के दो पद स्वीकृत हैं। इनमें से एक पद तो सालों से खाली चला आ रहा है। दूसरे पद पर डॉ. नरेंद्र सिंह थे, जिनका हाल ही में तबादला कर दिया गया है। नुमाइश के पास स्थित सत्यनारायण मेमोरियल बच्चा अस्पताल में भी बालरोग विशेषज्ञों के चारों पद रिक्त है। इसके अलावा अन्य किसी भी सीएचसी में बालरोग विशेषज्ञ नहीं है।
फिजीशियन और कार्डियोलाजिस्ट भी नहीं
जिला अस्पताल तथा सीएमओ स्तर पर फिजीशियन के 10 पर स्वीकृत हैं। सभी पद वर्तमान में खाली पड़े है। डॉक्टर न होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में कार्डियोलाजिस्ट के दो पद हैं। दोनों पद दो साल से खाली हैं। सप्ताह में चार दिन पीजीआई से फिजीशियन हार्ट रोगियों को देखने के लिए आते है और दोपहर दो बजे के बाद चले जाते है।
जिला अस्पताल में फिजीशियन तथा कार्डियोलोजिस्ट के पद तो पहले से ही रिक्त है। बालरोग विशेषज्ञ के दो पद है इनमें से एक पर डाक्टर पदस्थ थे लेकिन उनका भी जिले से बाहर तबादला कर दिया गया है। विभाग से खाली पद भरने की डिमांड की गई है। सीएमओ के अधीन डाक्टरों के पद खाली है। - डा. पियूष चंद्र पांडेय, सीएमएस इटावा