बिजौली के पास निर्माणाधीन कोल्ड स्टोरेज एवं उसमें रखे जा रहे आलू की बोरे
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जिले के कोल्ड स्टोरेज में मानकों की अनदेखी की जा रही है। इससे कभी भी कोई हादसा होने से इंकार नही किया जा सकता है। कानपुर जिले के शिवराजपुर में कोल्ड स्टोरेज में अमोनिया गैस के चैंबर में विस्फोट के बाद हुई जन हानि के बाद जिला प्रशासन ने कोई सबक नही लिया है। जिले में कई कोल्ड स्टोरेज ऐसे है जिनका अभी निर्माण कार्य चल रहा है और न ही उन्हें अभी लाइसेंस मिला है फिर भी उनमें आलू का भंडारण धड़ल्ले से हो रहा है। प्रशासन भी इसकी अनदेखा कर रहा है।
जिले में आलू के भंडारण के लिए 46 कोल्ड स्टोरेज के लाइसेंस जिला उद्यान विभाग ने जारी किए हैं। इस वर्ष पांच कोल्ड स्टोरेज नए बने हैं। इनका निर्माण कार्य पूरी तरह से समाप्त भी नही हुआ कि इनके मालिकों ने आलू भंडारण शुरू कर दिया। इन कोल्ड स्टोरेज के मालिकों के पास अभी तक लाइसेंस भी नही है। आलू को ठंडा करने के लिए लगाई मशीनों को अनट्रेंड लोग ही आपरेट कर रहे है। इसके अलावा काम पर लगे कर्मचारियों के लिए बीमा आदि की कोई व्यवस्था भी नही है। किसी भी कोल्ड स्टोरेज के मालिकों ने अपने श्रमिकों का श्रम विभाग में रजिस्ट्रेशन नही कराया है। इस बारे में श्रम अधिकारी कुंअर सिंह ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज में काम करने वाले संगठित प्रक्रिया के अंतर्गत आते है उनका रजिस्ट्रेशन एडीएफ यानि सहायक निदेशक फैक्ट्री कानपुर के यहां होता है। वह केवल बोनस एक्ट का निरीक्षण करते है।
जिला उद्यान अधिकारी राजेंद्र कुमार ने बताया कि कानपुर की घटना के बाद से विभाग द्वारा कोल्ड स्टोरेजों का निरीक्षण किया जा रहा है। सभी को चेतावनी दी गई है कि क्षमता से अधिक का भंडारण न करें। नोटिस दिए जा रहे है कि वह अपने भवन व मशीनों का फिटनेस सर्टिफिकेट जल्द विभाग में जमा कराएं। उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी में नही है कि बिना लाइसेंस के कोल्ड स्टोरेज चल रहे हैं। वह जांच कराएंगे जो भी ऐसा करता पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।