चकरनगर। बीहड़ क्षेत्र के पिपरौली गढ़िया स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपेक्षा का शिकार है। करीब 50 गांवों की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए यहां यह केंद्र स्थापित किया गया था। पीएचसी पर किसी भी डॉक्टर की तैनाती न हाेने के कारण यहां पर मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। औपचारिकता पूरी करने के लिए यहां तैनात एक फार्मासिस्ट व लैब टेक्नीशियन मरीजों का इलाज करते हैं।
पीएचसी पिपरौली गढि़या पर डॉक्टर सहित 18 कर्मचारियों के पद स्वीकृत हैं लेकिन तैनाती सिर्फ फार्मासिस्ट व एलटी की ही है। यही कारण है कि क्षेत्र के ज्यादातर लोग बीमार होने पर पीएचसी पर जाने के बजाय निजी क्लीनिकों का रुख करते हैं। कर्मचारियों की कमी के चलते अस्पताल की व्यवस्था चौपट है। पिछले पांच सालों से अस्पताल की बाउंड्री टूटी हुई है। इसके चलते छुट्टा जानवर अस्पताल परिसर में घूमते रहते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली के कारण क्षेत्र के जरूरतमंद लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अस्पताल में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की शीघ्र नियुक्ति कराने, टूटी बाउंड्रीवाल का निर्माण कराने की मांग की है, जिससे क्षेत्र की जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
बिड़ौरी निवासी सरिता देवी ने बताया कि आठ किलोमीटर दूर गांव से ऑटो से पिपरौली गढ़िया सीएचसी इलाज के लिए आयी थीं लेकिन यहां कोई डॉक्टर ही नहीं मिला।
कस्बा निवासी सुरजीत यादव ने बताया कि पीएचसी पर डॉक्टर न होने के कारण गांवों में झोलाछाप का बोलबाला है। लोग झोलाछाप व निजी क्लीनिकों पर इलाज कराना बेहतर समझते हैं।
वर्जन
पिपरौली गढ़िया अस्पताल में डाॅक्टर तैनात नहीं है। सीएमओ साहब को भी पता है। कई बार डॉक्टर तैनात किए जाने के लिए सीएमओ को पत्र लिखा है, लेकिन अभी तक तैनाती नहीं हुई है।
-महेशपाल सिंह, सीएचसी अधीक्षक राजपुर
वर्जन
पंचायत या स्वास्थ्य विभाग दोनों से बाउंड्री बन सकती है। अभी तक मेरे पास कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलती है तो शीघ्र दीवार बनवाई जाएगी।
- यदुवीर सिंह, बीडीओ चकरनगर