केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने गरीबों को छत मुहैया कराने की मंशा से कस्बे के कोठी कैस्त और लुधपुरा में 468 आवासों का निर्माण कराया था।
आवासों को बने 12 साल से ज्यादा का समय बीत गया है, लेकिन लाभार्थियों को इनका आवंटन नहीं सका।
लोग अभी भी झुग्गी झोपड़ियों में दिन गुजार रहे हैं। हाल यह है कि कार्यदायी संस्था डूडा ने कालोनियों को नगर पालिका को हस्तांतरित तक नहीं किया है।
2008 में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय व प्रदेश सरकार ने संयुक्त रूप से मोहल्ला कोठी कैस्त में 228 कालोनी और लधुपुरा में 240 कालोनियों का निर्माण शुरू कराया। 2011 तक कालोनियों का 80 प्रतिशत से ज्यादा कार्य पूरा हो चुका था। इस दौरान लाभार्थियों की सूची बनी।
जिसके अनुसार अनुसूचित जाति के पात्रों को 12 हजार 789 रुपये, सामान्य व पिछड़ा वर्ग के लाभार्थियों को 15 हजार 107 रुपये जमा करने थे। विभागीय नोटिस के अनुपालन में 250 लाभार्थियों ने धनराशि जमा कर दी थी।
नगर पालिका परिषद ने उन्हे रसीदें भी प्रदान कीं। साथ ही लोगों को जल्द आवास आवंटित किए जाने का आश्वासन दिया गया। इन सबके बावजूद कालोनियां आज तक नही दी गईं।
यह कालोनियों ऐसे लोगों को आवंटित होनी हैं जो गरीबी की रेखा के नीचे थे। जिनके पास केवल रहने के लिए झोपड़ी और कच्चे मकान हैं।
लगभग 12 साल का समय बीत गया है, लेकिन डूडा अभी तक गरीबों को आवंटन पत्र नही दे पाया।
अधिकारी यहां आते है और जांच पड़ताल करके चले जाते है। अव इन खाली पड़ी कालोनियों का अवैध कामों में इस्तेमाल किया जा रहा है। अराजक तत्व कालोनियों की खिड़की और चौखट उखाड़ ले जा रहे हैं।
इसके अलावा पाइप लाइनें भी अराजक तत्वों ने उखाड़ लिया है। कोई भी चौकीदार नियुक्त नही है।
कोठी कैस्त के अनीता देवी, ज्ञान सिंह, श्याम सिंह, शेर सिंह, अलवर सिंह, राजेश कुमार, आदि लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इन कोलानियों के लाभार्थियों को शीघ्र आवंटन पत्र दिया जाए। जिससे गरीब लोग उसमें रहकर गुजर बसर कर सकें।
अधिशाषी अधिकारी रामेन्ंद्र सिंह ने बताया कि अभी तक डूडा ने कालोनी हस्तांतरित नहीं की हैं। जिसके चलते लाभार्थियों को आवासों का आवंटन नहीं हो सका है। यह सही की पात्र परिवारों को आवंटन न होेने के चलते उन्हे कालोनी नही मिल पा रही है।