जिले के वोटरों ने भले ही सपा मुखिया के गृह क्षेत्र की अहमियत को दरकिनार करके भाजपा को लोकसभा सीट हासिल कराई, लेकिन भाजपा सांसद चुनाव जीतने के बाद से जनता जनार्दन को भूले हुए हैं। अव्वल तो वह जिले में नजर नहीं आते और अब तो उन्होंने अपनी सांसद निधि भी औरैया जिले में ट्रांसफर करा ली है। यानि निधि की रकम अब औरैया जिले से ही खर्च करेंगे। भाजपा सांसद के इस कदम से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
जो पहले किसी सांसद ने नहीं किया वो मोदी लहर में चुने गए भाजपा सांसद अशोक दोहरे ने करके दिखा दिया। इटावा लोकसभा सीट का दायरा देखें तो इसमें इटावा, औरैया और कानपुर देहात जिले के विधानसभा क्षेत्र आते हैं। चूंकि सीट इटावा जिले की है, लिहाजा चुनाव कराने से लेकर सांसद निधि के खर्च आदि सभी कार्य इटावा जिले से ही होते हैं, लेकिन सांसद ने अपनी सांसद निधि को औरैया जिले में स्थानांतरित करा लिया है।
अब वह औरैया जिले से ही अपनी सांसद निधि खर्च करेंगे। एमपीलैड्स के ज्वाइंट डायरेक्टर विवेक शुक्ला के भेजे पत्र के आधार पर सांसद निधि की पहली किस्त 2.5 करोड़ रुपये 10 फरवरी को औरैया जिले के लिए ट्रांसफर कर दी गई है। पत्र में साफ लिखा है कि सांसद ने औरैया को नोडल डिस्ट्रिक्ट के तौर पर चुना है।
सांसद के द्वारा उठाए गए इस कदम के पीछे कारण कुछ भी रहे हों, लेकिन जनता में इस बात की शिकायत आम रही है। जनती कह रही है कि चुनाव जीतने के बाद से सांसद जिले में नजर नहीं आते। नौ महीने होने को आए हैं, वे किसी सार्वजनिक कार्यक्रम यहां तक कि जिला योजना जैसी अहम बैठक में भी नहीं दिखे।
अपनी सांसद निधि को औरैया ट्रांसफर कराकर मानो उन्होंने इटावा जिले से किनारा कर लिया है। यह बात दीगर है कि वह अपनी निधि का इस्तेमाल अपने संसदीय क्षेत्र में कहीं भी कर सकते हैं, लेकिन सीट की जो पहचान इटावा जिले से जुड़ी हुई है, उसे नोडल जिला होने का जो रुतबा हासिल था उसे जरूर छीन लिया है।
सांसद का यह निर्णय जिले के वोटरों के लिए इसलिए भी पीड़ादायक है कि उन्होंने समाजवादी पार्टी के लिए सर्वाधिक अहमियत रखनी वाली सीट से भाजपा प्रत्याशी विजेता बनाया। ऐसे में जिले को दोयम दर्जे की हैसियत में रखा जाना हजम नहीं हो रहा।
सुविधा की दृष्टि से किया यह
डीआरडीए के परियोजना निदेशक प्रदीप कुमार यादव का कहना है कि सांसद ने अपनी सुविधा की दृष्टि से औरैया को नोडल जिला बनाने का निर्णय लिया है। इससे अधिक इसमें और कुछ नहीं है। परियोजना निदेशक ने इस बात का जवाब नहीं दिया कि इस निर्णय की आखिर जरूरत क्यों पड़ी।
फिर नहीं उठा सांसद का फोन
अपने जिले के सांसद ने तो जैसे फोन न उठाने की कसम खाई हुई है। निधि औरैया से संचालित करने के मुद्दे पर हमने सांसद अशोक दोहरे को फोन किया तो रिसीव नहीं हुआ। इससे पहले बुधवार को सांसद के गोद लिए गांव की हकीकत बताने के लिए उन्हें की गई कॉल रिसीव नहीं हुई थी।
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हमें इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है। सांसद निधि के लिए औरैया को नोडल जिला बनाया गया है। ढाई करोड़ रुपये की पहली किस्त औरैया जिले को स्थानांतरित कर दी गई है।-डॉ. अशोक चंद्र, सीडीओ, इटावा