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पानी छूटा, चंबल में बाढ़, कोटा बैराज का पानी आने से कई गांव पानी से घिरे

Tue, 28 Jul 2015 11:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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कोटा बैराज से छोड़ गए पानी से जिले में चंबल नदी उफान पर है। मंगलवार को चंबल नदी का जलस्तर खतरे के निशान से तीन मीटर ऊपर पहुंच गया। चंबल में आई बाढ़ के कारण बीहड़ी क्षेत्र के दर्जन भर गांव टापू बन गए।
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सड़कों पर पानी भरने से कई गांवों से संपर्क टूट गया। पानी भरने से प्रशासन भी अलर्ट हो गया है और पूरे स्थिति पर आला अधिकारी नजर बनाए रखे हुए हैं। समाचार लिखे जाने तक बाढ़ के पानी से जिले में कोई जनहानि नहीं हुई थी।

राजस्थान के कोटा बैराज से चंबल नदी में पानी छोड़े जाने से जिले में चंबल नदी ने विकराल रूप धारण किया हुआ है। मंगलवार की शाम तक चंबल नदी खतरे के निशान 119.80 मीटर से तीन मीटर ऊपर 122.83 मीटर पर बह रही थी। बाढ़ के पानी से चंबल नदी के आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है।
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खेतों में पानी भरने से बोई गई फसल जलमग्न हो गई है। इससे किसानों का नुकसान हुआ है। इसका अनुमान तो बाढ़ का पानी घटने के बाद ही लगाया जा सकेगा। चंबल का विकराल रूप देखकर नदी किनारे रहने वाले काफी चिंतित हैं। लोगों को अनिष्ट की आशंका काडर सता रहा है।

चकरनगर प्रतिनिधि के अनुसार चंबल का जलस्तर बढ़ने से पचनद पर चंबल से मिलीं यमुना व क्वारी नदियों में भी पानी बढ़ने लगा है। तीनों नदियों का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र के दर्जन भर से अधिक गांवों की कछारी भूमि जलमग्न हो गई है।

बाढ़ के पानी से भरेह, हरौली, कांयची, गौहानी, खिरीटी, रनिया, नौगवां, निरी, गढ़ाकास्दा, कचहरी, नीवरी आदि गांवों की कछारी भूमि जलमग्न हो गई है। सभी गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। ऐसे में गांव में आना-जाना मुश्किल हो गया है। इसी तरह चकरनगर क्षेत्र में स्थित भरेह मंदिर मार्ग पर पानी भरने से यातायात बाधित हो गया है।

बाढ़ का पानी महुआ सूड़ा-सिकरौड़ी मार्ग तक पानी पहुंच चुका है। इसी तरह भरेह-हरौली मार्ग पर पानी भर गया है। इससे  हरौली गांव जाना मुश्किल हो गया है। अगर बाढ़ का पानी इसी तरह बढ़ता है तो दिक्कतें और बढ़ेगी। चंबल के साथ ही अन्य नदियों में पानी बढ़ने को लेकर प्रशासन अलर्ट हो गया है।

एसडीएम प्रमोद कुमार तिवारी ने तहसीलदार के साथ मिलकर क्षेत्र के गांवों का भ्रमण करके स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि अभी स्थित चिंताजनक नहीं है। बाढ़ पर पूरी तरह से नजर रखी जा रही है। अगर जलस्तर और बढ़ता है तो नदियों के किनारे बसे गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा जाएगा।

अभी तक पानी किसी भी गांव के अंदर तक नहीं पहुंचा है। वहीं केंद्रीय जल आयोग के उदी स्थल प्रभारी बृजवीर सिंह ने बताया कि चंबल नदी खतरा के निशान से तीन मीटर ऊपर मंगलवार की दोपहर तक बह रही थी। देर शाम पानी कुछ कम होना शुरू हुआ है। उम्मीद की जा रही है कि बुधवार को जलस्तर में गिरावट आएगी।
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