इटावा। माघ का महीना छह जनवरी से तीन फरवरी तक चलेगा। इस बार 15 जनवरी को मकर संक्रांति और खिचड़ी का पर्व है। पर्व को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। गंगा में डुबकी लगाने के लिए कानपुर, बिठूर और आसपास क्षेत्रों में जाने का श्रद्धालु कार्यक्रम बना रहे हैं। इस पर्व पर दान का विशेष महत्व होता है।
प्राचीन शिव मंदिर के महंत पंडित भुवनेश कुमार मिश्र बताते हैं कि इस बार संक्रांति 14 जनवरी बुधवार को रात 1ः20 से मिल रही है। ऐसे में मकर संक्रांति का पर्व गुरुवार 15 जनवरी को होगा। उत्तरायण में किया गया दान श्रेष्ठ होता है। द्वापर युग में भीष्म पितामाह (जिन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान था) बाणों की शैय्या पर रक्त रंजित पड़े हुए थे।
उन्होंने शारीरिक पीड़ा झेलते हुए उत्तरायण सूर्य की प्रतीक्षा की और इसी में प्रवेश करते ही प्राण त्याग दिए। पंडित श्री मिश्र का कहना है कि माघ माह का पहला स्नान छह जनवरी को हो चुका है। दूसरा स्नान 15 जनवरी मकर संक्रांति के दिन होगा। इसके बाद छठवां स्नान 3 फरवरी को माघी पूर्णिमा के दिन होगा।
मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि से मिलने उनकी राशि मकर में प्रवेश करते हैं। इस अवधि में सूर्य और शनि की प्रसन्नता के लिए गुड़ से काले तिल के लड्डू, काले उड़द की दाल मिलाकर खिचड़ी का दान करें। इसके साथ ही कंबल, फल का दान भी पुण्यदायी माना गया है।