ताखा। बिना बाप की बेटी के हाथ पीले करने की जिम्मेदारी ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से उठाते हुए अनूठी मिसाल पेश की। क्षेत्र के ग्राम रामनगर बम्हनीपुर में ग्रामीणों ने एक अति निर्धन लड़की की शादी बड़े ही धूमधाम से की।
बीते साल कोरोना की दूसरी लहर में रामनगर निवासी श्रीकृष्ण तिवारी की एक दिन बुखार आने से मौत हो गई थी। परिवार में उनकी पत्नी नीलम, बेटी निशा, बेटे रिंकू और सर्वेश बेसहारा हो गया।
श्रीकृष्ण की मौत के बाद परिवार में कमाने वाला कोई नहीं रहा। बेटे रिंकू और सर्वेश दोनों मंदबुद्धि होने के कारण परिवार की पूरी जिम्मेदारी नीलम पर आ गई। भूमिहीन होने के साथ श्रीकृष्ण के परिवार के पास रहने के लिए छत तक नहीं।
आखिर बिटिया की शादी कैसे होगी। परिवार इसी उधेड़बुन में लगा था। ग्रामीणों को इस कठिनाई का अहसास हुआ। ग्रामीणों ने नीलम से कहा कि निशा आपकी बेटी ही नहीं पूरे गांव की बेटी है।
उसकी शादी इतनी धूमधाम से होगी कि उसे अपने पिता के न होने का अहसास ही नहीं होगा। ग्रामीणों ने ही रहिपालपुर सौरिख निवासी बह्म शंकर के बेटे मोहित से तय कर दी। 29 जनवरी को बारात आई।
ग्रामीणों ने उसका स्वागत किया और अन्य सारी रस्में ग्रामीणों ने निभाई। निशा की शादी धूमधाम से हुई। शनिवार को पूरा गांव एक परिवार बन चुका था। शनिवार शाम को ग्रामीणों ने निशा की विदाई अपनी बेटी की तरह की। सहयोग और संवेदना की पूरे क्षेत्र में चर्चा है।