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महंगाई के दौर में गोवंश के लिए कम पड़ने लगी 30 रुपये की खुराकी

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ताखा (इटावा)। शासन से पर्याप्त और समय पर बजट न मिलने से गोशालाओं में संरक्षित गोवंशों को भरपेट चारा नहीं मिल पा रहा है। हरे चारे की बुआई के लिए जमीन नहीं मिल रही है, जबकि ब्लाक क्षेत्र की प्रत्येक ग्राम पंचायत में चरागाह की भूमि संरक्षित है। चरागाह की भूमि पर गांवों के रसूखदार लोग कब्जा किए हैं। चरागाह पर जमीनों पर कब्जे की शिकायतें ब्लाक से लेकर तहसील के अधिकारियों तक पहुंचीं भी हैं।
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बनीहरदू ग्राम पंचायत की गोशाला टकपुरा मजरे में बनी है। इस गोशाला में लगभग 50 गोवंश संरक्षित हैं। टकपुरा में लगभग 56 बीघा चरागाह भूमि है। पूरी भूमि पर ग्रामीणों ने कब्जा कर रखा है।
कुरखा गांव में चरागाह की 12 बीघा जमीन पर भी कब्जा है। इस गांव की अस्थायी गोशाला में 81 गोवंश संरक्षित हैं। चरागाह की भूमि खाली करवाने के लिए राजस्व विभाग से मौखिक व लिखित शिकायत की जा चुकी है।
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मुर्चा गांव की 130 बीघा चरागाह की भूमि पर गांव के रसूखदार लोग कब्जा किए हैं। गोशाला में संरक्षित 215 गोवंशों को हरा चारा नहीं मिल पा रहा है।
समथर गांव में भी 250 बीघा चरागाह की जमीन पर गांव के लोग कब्जा किए हैं। इस गांव की गोशाला में 284 गोवंशों को भी नियमानुसार पर्याप्त चारा नहीं मिल पा रहा है।
मामन हिम्मतपुर गांव में तो 600 बीघा ग्राम समाज और लगभग 60 बीघा चरागाह की भूमि पर कब्जे हैं। इस गांव की अस्थायी गोशाला में संरक्षित 145 गोवंश भी हरे चारे को तरसते रहते हैं। मौहरी गांव में भी 13 बीघा चरागाह की जमीन पर कब्जा है। इस गांव की अस्थायी गोशाला में 30 संरक्षित हैं।
30 रुपये में नहीं भरता गोवंश का पेट
ताखा। शासन ने गोवंश को चारा और दाना खिलाने के लिए 30 रुपये तय किए हैं। इसी धनराशि में देखरेख के लिए सेवादार भी रखने हैं। भूसा और दाना के दाम कई गुना बढ़ गए हैं, जिससे इतनी कम धनराशि में गोवंशों का पेट नहीं भर पा रहा है। कम धनरशि मिलने से प्रधान और पंचायत सचिव परेशान हैं।
दरअसल ग्रामीण क्षेत्र की ज्यादातर गोशालाओं के संचालन की जिम्मेदारी पंचायत सचिवों और प्रधानों के पास है। प्रधानों का कहना है कि शासन से प्रति गोवंश 30 रुपये ही मिलते हैं। पैसे भी समय पर नहीं आते हैं। इस समय भूसा तीन रुपये किलो में मिल रहा है। दाना का भाव भी बढ़ गया है। (संवाद)
वर्जन
ब्लाक क्षेत्र की सभी ग्राम पंचायतों अपने अपने प्रभार वाले गांवों में चरागाह की भूमि पर कब्जा होने की जानकारी राजस्व विभाग को दे दी है। एसडीएम ने जल्द ही चरागाह और सरकारी जमीनों से कब्जे हटवाने का आश्वासन दिया है। देवेंद्र सिंह, एडीओ पंचायत
फोटो संख्या 17- ऊमरसेंडा में चारागाह भूमि पर खड़ी फसल कटवाते राजस्वकर्मी। संवाद
सात बीघा जमीन कब्जा मुक्त कराई
संवाद न्यूज एजेंसी
भरथना। ग्राम ऊमरसेंड़ा में शनिवार को तहसीलदार के निर्देश पर चरागाह की सात बीघा भूमि कब्जा मुक्त कराई गई। लेखपाल अजय यादव ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर ऊसराहार में कब्जा कर बोई गई गेहूं की फसल कटवा ली। तहसीलदार प्रभात राय ने बताया कि सरकारी भूमि की कृषि उपज की नीलामी कराई जाएगी। (संवाद)
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