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‘प्रभु कृपा से मानव शरीर मिला’

Wed, 08 Jul 2015 11:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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‘प्रभु की कृपा से हम लोगों को मानव शरीर की प्राप्ति हुई है। इसमें रहकर गृहस्थ आश्रम व प्रभु की याद दोनों काम करना चाहिए।’ यह बातें बाबा जयगुरुदेव महाराज के उत्तराधिकारी पंकज जी महाराज ने खितौरा स्थित आश्रम पर सत्संग के दौरान कहीं।
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वह नेपाल, बिहार, झारखंड व उत्तर प्रदेश के सत्संग दौरे के समापन पर काफिले के साथ जयगुरुदेव आश्रम खितौरा पहुंचे थे। सत्संग में पंकज जी महाराज ने कहा कि बाबा जयगुरुदेव महाराज ने परिश्रम करके बीस करोड़ जीवों को प्रभु प्राप्ति की सरल साधना में लगाया। उन्होंने अच्छे समाज के निर्माण का महाअभियान चलाया।

इसके तहत शाकाहार-सदाचार अपनाने के जन जागरण के कार्यक्रम निरंतर चलाए जा रहे हैं। नशा सेवन से चित्त में चंचलता पैदा होती है। लोगों की आंखों में मां-बहन, बेटी की पहचान आवश्यक है। इससे हमारा समाज अच्छे प्रकार चलेगा।
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सत्संग के दौरान प्रबंधक चरन सिंह एडवोकेट, मीडिया प्रभारी राजेन्द्र भसीन, व्यवस्थापक सुनील यादव, डा. करुणाकांत मिश्रा, विनय कुमार सिंह, संत राम चौधरी, मनोज कुमार सिंह, अनूप कुमार सिंह, रोहिताश कुमार गुप्ता, विजय प्रकाश श्रीवास्तव, संजय शर्मा, महाराज सिंह यादव, वीरेंद्र सिंह यादव सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

काफिले का जगह-जगह हुआ स्वागत
पंकज महाराज के काफिले का जगह-जगह पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया गया। निवाड़ी कलां, उझियानी, बकेवर में भी श्रद्धालु मौजूद रहे। पंकज महाराज ने बताया कि वह नेपाल दौरे के दौरान काठमांडू भी गए। जहां सब कुछ तबाह होने के बाद भी बाबा जयगुरुदेव के अनुयायी दो परिवार सही सलामत हैं।

गुरु पूर्णिमा पर होंगे कार्यक्रम
पंकज जी महाराज ने बताया कि 29 जुलाई से 2 अगस्त तक पांच दिवसीय गुरुपूर्णिमा पर्व जयगुरुदेव आश्रम मथुरा में मनाया जाएगा। इसके साथ ही अच्छे समाज के निर्माण के कार्यक्रम के तहत अक्तूबर में एक सत्संग महासम्मेलन का आयोजन लखनऊ में होगा। 

‘जो स्वयं को वश में कर ले वही सबसे शक्तिशाली ’
इटावा। ‘संसार में ताकतवर कम, कमजोर लोग बहुत हैं। कमजोर उन्हें नहीं कहते जो धन, शरीर से कमजोर हैं बल्कि कमजोर वे हैं जो धन, शक्ति, वैभव से संपन्न होने पर भी खुद को वश में नहीं कर पाते। कमजोर को दूसरे अपने वश में कर लेते हैं। सबसे शक्तिशाली वही इंसान है जिसने स्वयं को वश में कर लिया हो।’

ये बातें आचार्य श्री 108 विनम्र सागर जी महाराज ने लालपुरा स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में एक कार्यक्रम में कहीं। उन्होंने कहा कि दूसरों को वश में करना पराधीनता है लेकिन स्वयं को वश में करना स्वाधीनता है। वश का उल्टा शव होता है जो स्वयं को वश में न कर पाए वह धरती पर जिंदा शव के समान हैं।

दुनिया उन्हीं ने बनाई है जो वश में नहीं रहे और ये उन्हीं के वश में रहती है जो अपने वश में है। स्थान बदलने से या इंद्रिय को बांध लेने पर कोई भी मन को वश में नहीं कर पाता लेकिन स्वयं में सच्चा ज्ञान पैदा कर उपयोग बदलने पर इंद्रिय मन को वश में किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि गुलाम वह नहीं होता जो शरीर से बंधे हों बल्कि गुलाम वह हैं जो मन से बंधा हो। जिस समय व्यक्ति दासता स्वीकार करता है उसी समय व्यक्ति की आधी योग्यता नष्ट हो जाती है। अपने दीप हमें स्वयं ही बनना चाहिए तभी स्वयं को वश में करके अपनी जीवन को ज्ञानमय कर सकते हैं।
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