मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की नजर में लॉयन सफारी प्रोजेक्ट जितना अहम है, लोगों की उम्मीद भी उससे कुछ कम नहीं हैं। लाइलाज बीमारी के चलते एक जोड़ा शेर की मौत सफारी प्रशासन के लिए किसी सदमे से कम नहीं रही। आम लोगों के बीच भी इसका कोई अच्छा संदेश नहीं गया। फिर भी आशाओं के दीये अभी बुझे नहीं हैं।
उम्मीद की जानी चाहिए कि नए साल में शेरों के परिवार में किसी नन्हे मेहमान का आगमन हो। यह बात दीगर है कि सफारी प्रशासन फिलहाल प्रजनन के मामले में सफलता मिलने की बात नहीं कर रहा है।
लॉयन सफारी में इस समय तीन जोड़ा शेर हैं। तीनों जोड़े स्वस्थ हैं, ऐसा दावा भी सफारी प्रशासन की ओर किया जा रहा है। इनमें सबसे अधिक उम्मीदें 6-6 साल के मनन शेर और कुंवारी शेरनी के जोड़े से है। इस जोड़े को यहां सबसे पहले गत 11 अप्रैल को लाया गया था।
प्रशासन इनकी मीटिंग के प्रयास भी करता आ रहा है। इसमें कितनी सफलता मिली है, फिलहाल सफारी प्रशासन कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। मनन और कुंवारी का जोड़ा आने के बाद गत सितंबर माह में बाकी तीन अन्य जोड़े यहां लाए गए। इसमें गत 2 सितंबर को कुबेर और ग्रीष्मा, 8 सितंबर को गीगो और हीर और 10 सितंबर को विष्णु और लक्ष्मी नाम के जोड़े यहां पहुंचे थे।
इसमें अंतिम जोड़े की बीमारी के चलते मौत हो चुकी है। शेष दो जोड़ों के आपसी तालमेल के लिए वक्त की दरकार है। सफारी प्रशासन के लिए मुसीबत उस समय से शुरू हुई, जब इस आखिरी जोड़े को लाइलाज बीमारी ने घेर लिया।
नतीजतन जो प्रयास एशियाटिक प्रजाति के प्रजनन को लेकर होने चाहिए थे, उसकी जगह इलाज की माथापच्ची में गुजरा। गत 30 अक्टूबर को शेरनी लक्ष्मी ने आंखें मूंदी और उसके 17 दिन बाद नर शेर विष्णु की भी मौत हो गई।
इस घटना से शासन और सफारी प्रशासन दोनों स्तब्ध रहे। इस हैदराबादी एशियाटिक शेर के जोड़े की मौत से लोगों को भी धक्का पहुंचा। अब फिर से नई उम्मीदों ने जोर पकड़ा है। सफारी प्रशासन पूरी तैयारियों में लगा हुआ है कि यहां मौजूद शेरों के जोड़े से एशियाटिक शेरों की प्रजाति को बढ़ावा दिया जा सके।
हालांकि अभी किसी शेरनी के गर्भवती होने की पुष्टि सफारी प्रशासन नहीं कर रहा है, लेकिन जोड़े की मीटिंग के प्रयास लगातार जारी है। ऐसे में यह उम्मीद रखना बेमानी नहीं होगी कि नए साल में लॉयन सफारी से कोई सुखद समाचार लोगों के सामने आए।
कुंवारी-मनन को खुले बाडे़ में रखा साथ
मीटिंग में आसानी रहे, इसके लिए कुंवारी व मनन को एक साथ बाड़े में रखा गया। मगर उसमें भी यह समस्या सामने आई कि शाम के वक्त शेर, शेरनी को बाड़े से वापस नहीं आने देता था। ऐसे में शेरनी के घायल होने की आशंका रहती थी। दरअसल शेर कब खूंखार हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। बाहर भी बगैर देखभाल के दोनों को खुला नहीं छोड़ा जा सकता है। बहरहाल सफारी प्रशासन यह पूरी प्रक्रिया उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए ही पूरा करता है। यहीं नहीं इस दौरान बाड़े के चारों ओर पानी के टैंकर रखे गए। पटाखों का भी इंतजाम रखा गया। डाक्टरों के मुताबिक मीटिंग के वक्त मेल उतना ही आगे बढ़ता है, जितना फीमेल रास्ता देती है। यहां कुंवारी ने पिछले दिनों तक मनन से 5-6 फीट की दूरी बनाए रखी।