भरथना। साहित्य न केवल समाज बल्कि देश की दिशा तय करता है। कविता हमारे जीवन को प्रफुल्लित कर हमें सकारात्मक बनाती है। यह बातें सोमवार को स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर पशुधन आश्रम मोढादेव में काव्य समारोह में समाज सेवी डॉ. ईश पांडेय ने कही।
कार्यक्रम में मां सरस्वती व स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण के उपरांत बकेवर से पधारी डॉ. मंजू यादव ने वाणी वंदना की। युवा शायर आमिर अफजल इटावी ने देश प्रेम और श्रृंगार की रचनायें सुनायीं। उनकी रचना लहू हिंदू मुसलमा का दुरंगा हो नहीं सकता, अगर यह सोच रख लें सब तो दंगा हो नहीं सकता, पर खूब तालियां बजी। कवि अरविंद योगी ने देश के वर्तमान हालातों और किसान की परेशानियों को उजागर करती रचना सुनाई। वरिष्ठ शायर अशोक यादव ने मुक्तक और गजलों को सुना कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तेज हवाएं गाफिल नाविक और टूटी पतवारें हों, फिर कश्ती को पार लगाना कितना मुश्किल होता है, जैसे शायरी पर खूब तालियां बजी। इटावा के युवा कवि रोहित चौधरी की समसामयिक विषयों व देश में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में पढ़ी गई कविता तरक्की वाला हमको घायल हर अरमान मिला सर्द रात में बिन कंबल के ठिठुरा हुआ किसान मिला, पर श्रोता झूम उठे। डॉ. मंजू यादव की रचनाएं खूब सराही गयीं। संचालन कर रहे जनवादी कवि अनिल दीक्षित ने वर्तमान हालातों पर तीखे सवाल उठाये, पेट भर रोटी कब मिलेगी मुझे ,मेरा बेटा सवाल करता है जैसी लाइनों पर श्रोता भावुक हो गये। गोष्ठी के प्रारंभ में संयोजक श्रीकृष्ण यादव एवं सामाजिक संत अनिल गुरुजी ने कवियों और अतिथियों का स्मृतिचिन्ह देकर सम्मान किया। अध्यक्षता शिक्षाविद प्रदीप पाण्डेय ने सभी का आभार व्यक्त किया।