मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट लायन सफारी के तारे एक बार फिर से गर्दिश में हैं। आईवीआरआई बरेली गए शेर गीगो व कुबेर के ब्लड सैंपल में भी बबेसिया पॉजीटिव पाए जाने से सफारी प्रशासन सदमे में है।
इस संबंध में लायन सफारी के अधिकारी मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं। सूत्रों का यह तक कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद आइवीआरआई के विशेषज्ञों की सलाह पर शुक्रवार से दोनों शेरों को एंटी बबेसिया की दवाई दी जाने लगी है।
गुरुवार शाम को लायन सफारी प्रशासन में हड़कं प मच गया।
आईवीआरआई बरेली गई शेर गीगो व कुबेर के ब्लड रिपोर्ट में भी बबेसिया ग्रस्त होने के लक्षण पाए गए। ब्लड रिपोर्ट के साथ ही आइवीआरआई बरेली के डॉक्टरों ने सफारी प्रशासन को दोनों शेरों का बबेसिया का इलाज शुरू करने की सलाह दी है। जिसके बाद शुक्रवार को ही सुबह से शेरों को एंटी बबेसिया की डोज देनी शुरू कर दी गई है।
वहीं लायन सफारी प्रशासन का कहना है कि शेर स्वस्थ हैं और उन्हें एहतिहात के तौर पर बबेसिया की दवाई दी जा रही है। जबकि उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि यह सर्तकता सिर्फ गीगो और कुबेर पर ही क्यों बरती जा रही है। जबकि लायन सफारी में मनन कुंवारी आदि शेर भी मौजूद हैं।
सफारी में सबसे पहले शेरनी तपस्या बबेसिया बीमारी की चपेट में आई थीं। हफ्ते भर के अंदर ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद शेर पटौदी व जेसिका भी बबेसिया के शिकार पाए गए और इनमें से जेसिका गंभीर स्थिति में पहुंचने के बाद जैसे तैसे सामान्य हुई। इसके बाद अब लंबे समय से सफारी में रह रहे शेर गीगो और कुबेर भी बबेसिया की चपेट में हैं। जो लायन सफारी की व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।
लायन सफारी के डायरेक्टर संजय श्रीवास्तव से जब इस संबन्ध में फोन पर बात की गई तो उनका कहना था कि गीगो व कुबेर को सिर्फ एहतिहात के तौर पर बबेसिया की दवाई दी जा रही है।
शुक्रवार को सुबह दोनों को पहली डोज दी गई है और अगले दो दिन तक और उन्हें यह दवाई खिलाई जाएगी। एंटी बबेसिया का कोर्स तीन दिन का होता है। उन्होंने बताया कि शेरों को दवाई आइवीआरआई बरेली के विशेषज्ञों की सलाह पर दी जा रही है। उन्होंने सफारी में अन्य किसी शेर को बबेसिया की दवा नहीं दिए जाने की बात कही।