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इमामबाड़ा बनाने वालों की जिंदगी में रहता उजाला

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इटावा। पक्की सराय स्थित बड़े इमामबाड़े में शादाब हसन व घटिया अजमत अली में बिलकीस रिजवी की छमाही पर मोहम्मद इबाद रिजवी की ओर से इमामबाड़ा में मजलिस का आयोजन किया गया।
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मजलिस में तकरीर करते हुए फर्रुखाबाद से आए मौलाना सदाक़त हुसैन ने कहा कि दरे हुसैन से रूह और जिस्म दोनों की गिजा मिलती है। जो लोग अपने लिए जिंदगी गुजारते हैं, महल बनाते हैं, मरने के बाद जिंदगी और महल में अंधेरा हो जाता है।
जो लोग हुसैन के लिए इमामबाड़ा बनाते हैं, उनकी जिंदगी और कब्र में उजाला रहता है। कानपुर से आए मौलाना नुसरत आब्दी ने कहा कि जब इंसान किसी को माध्यम बनाता है तो यह देखता है कि ईमानदार है।
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हमने रसूल सहित 12 इमाम को माध्यम बनाया, जिनकी मिसाल दुनिया में नहीं मिलती। रसूल कायनात के लिए रहमत और फातिमा जहरा रसूल के लिए रहमत हैं। कहा कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं है।
हमें इबादत की अहमियत को समझना चाहिए। मजलिस में सफदर हुसैन फिरोजाबाद, सलीम रजा, आलिम रिजवी, मसी रजा ने सोजख्वानी, तस्लीम रजा, मीसम, तकी हुसैन फिरोजाबाद, सलमान रिजवी, तालिब रजा ने पेशख्वानी और तनवीर हसन से नोहाख्वानी की।
मजलिस में मौलाना अनवारुल हसन जैदी, हाजी कमर अब्बास, हाजी अरशद मरगूब, राहत अकील, मुस्ते हसन, शावेज नकवी, राहत हुसैन रिजवी, शौजब, मुस्तुफा हुसैन आदि उपस्थित रहे।
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