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जि अस्पताल की लापरवाही से खतरे में पड़ी महिला की जान

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स्टेशन बजरिया स्थित रघुकुल अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही से महिला की जान खतरे में पड़ गई है। 17 जुलाई को प्रसव के लिए किए गए ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने महिला के पेट में सर्जिकल मॉब (कपड़े का टुकड़ा) छोड़ दिया।
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इसकी वजह से महिला के पेट में पस बना और उसे दूसरे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। परिजनों का कहना है कि महिला का दो बार ऑपरेशन करके कपड़ा और पस निकाला गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हो रहा है।
गुरुवार को परिजन इसकी शिकायत करने सीएमओ एनएस तोमर के पास पहुंचे तो आरोप है कि जानकारी मिलते ही वह पहले ही कार्यालय छोड़कर चले गए।
इकदिल निवासी महिला को 17 जुलाई को प्रसव के लिए रघुकुल अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।
आरोप है कि जिला अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉक्टर को बुलाकर ऑपरेशन करवाया गया। डॉक्टरों ने टांके लगाने के दौरान महिला के पेट में मॉब छोड़ दिया।
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हालत बिगड़ने पर 4 अगस्त को उसे दूसरे अस्पताल में भर्ती करवाया गया तो इसकी जानकारी हुई। महिला के परिजनों का कहना है कि अस्पताल की लापरवाही से वह जिंदगी से जंग लड़ रही है।
रघुकुल अस्पताल के डॉ.आईडी सिंह का कहना है कि इसमें गलती डॉक्टर की नहीं बल्कि नर्सिंग स्टाफ की है। इस बारे में सीएमओ डॉ. एनएस तोमर का कहना है कि अभी तक कोई पीड़ित उनके पास नहीं आया है। शिकायत आने पर जांच कराएंगे।
शहर के चांदनी अस्ताल में 26 जून को ऐसी ही लापरवाही से नवविवाहिता की बच्चेदानी धोखे से निकाल ली गई। मैनपुरी निवासी ध्रुव सिंह ने अपनी 22 वर्षीय पत्नी रीता का प्रसव के लिए चांदनी अस्पताल में भर्ती करवाया था।
गलत ऑपरेशन की वजह से रीता की हालत बिगड़ी को डॉक्टरों ने बिना परिजनों को बताए उसकी बच्चेदानी निकाल ली। इसके बाद इलाज के रुपये ऐंठकर पीड़िता को बिना किसी रेफर पर्चे के अस्पताल के बाहर कर दिया।
तबीयत बिगड़ती देख परिजन उसे कानपुर ले गए तब बच्चेदानी निकालने की जानकारी हुई। शिकायत पर सीएमओ एनएस तोमर ने इसकी जांच डिप्टी सीएमओ डॉक्टर अवधेश यादव को सौंपी।
ध्रुव सिंह का कहना है कि जांच अधिकारी ने बिना उनका बयान लिए ही अस्पताल को क्लिनचिट देने की तैयारी कर ली। डॉ अवधेश यादव का कहना है कि अबतक की जांच में अस्पताल की लापरवाही सामने नहीं आई है।
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