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सहसों से पकड़े गए तेंदुए की सफारी पार्क में मौत

Wed, 27 Sep 2017 11:11 PM IST
इटावा
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पिपरौली गढ़िया से पकड़ा गया था तेंदुआ। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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इटावा। पांच दिन पूर्व ग्राम पिपरौली गढिया के एक खेत में लगी कटीले तारों की बाड़ से निकाल कर लाए गए तेंदुए की बुधवार को मौत हो गई। तेंदुए को चंबल सेंचुरी, इटावा सफारी पार्क व आगरा से बुलाई गई टीम ने तारों से निकालकर इटावा सफारी पार्क में पहुंचाया था। इटावा सफारी पार्क प्रशासन तेंदुए की मौत के मामले को देर शाम तक छुपाए रहा। इसके बाद सफारी के डाक्टर गौरव श्रीवास्तव ने तेंदुए की मौत की पुष्टि की।
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जिले के सहसों क्षेत्र के ग्राम पिपरौली गढ़िया से बीते शनिवार को ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी थी कि गांव के एक खेत में लगे कटीले तारों की बाड़ में एक तेंदुआ फंसा है। इसके बाद इटावा सफारी पार्क के डाक्टर गौरव श्रीवास्तव, चंबल सेंचुरी के रेंज आफीसर सर्वेश भदौरिया व आगरा से आए विभागीय अधिकारियों की टीम ने तेंदुए को ट्रैंक्यूलाइजर से बेहोश कर ताराें से बाहर निकाला। इसके बाद घायल तेंदुए को लोहे के पिंजड़े में बंद कर इटावा सफारी पार्क ले आए थे।


सूत्र बताते हैं कि तेंदुए को यहां पशु अस्पताल लाया गया और डॉ. गौरव श्रीवास्तव तब से तेंदुए का इलाज कर रहे थे। बुधवार को तेंदुए की अचानक तबियत बिगड़ गई। इसके बाद इसकी मौत हो गई। सफारी प्रशासन दिन भर तेंदुए की मौत का मामला छुपाए रहे। रात सफारी के डाक्टर गौरव श्रीवास्तव ने तेंदुए की मौत की पुष्टी करते हुए बताया कि कटीले तार में फंसने से तेंदुए के  लीवर, किडनी और फेफडे़ गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे जिससे बुधवार को दोपहर 02 बजे उसकी मौत हो गई।
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डॉ. श्रीवास्तव ने बताया के तेंदुए की मौत के बाद सफारी के पोस्टमार्टम हाउस में उसका पोस्टमार्टम भी कराया गया है। रिपोर्ट में मौत का कारण भीतरी अंगों का काम न करना आया है। रिपोर्ट शीघ्र उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी। डॉ. श्रीवास्तव का कहना है कि तेंदुए को लेपर्ड सफारी के क्वारनटाइन हाउस में रखा गया था।  वहीं पर उसको इलाज दिया जा रहा था।

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सीजेडए की अनुमति के बिना रखा गया था
इटावा। नियमानुसार इटावा सफारी पार्क में बिना सीजेडए की अनुमति के किसी जानवर को प्रवेश नहीं दिया जा सकता है। तेंदुए के मामले में सफारी प्रशासन ने नियमों को पूरी तरह से ताक पर रख दिया और तेंदुए को सफारी में रखने से पूर्व सीजेडए से अनुमति लेने की बात तो दूर इसकी जानकारी देना भी उचित नहीं समझा। पांच दिन तक तेंदुए को सफारी में ही रखकर इलाज किया गया और उसकी यहीं पर मौत भी हो गई। जानकाराें की माने तो यह सीजेएड के नियमों का सरासर उल्लंघन है। जब इस संबंध में सफारी के डॉ. गौरव श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने भी इस बात को स्वीकारा कि तेंदुए को सफारी में लाने की अनुमति सीजेएड से नहीं ली गई। उनका कहना था कि तेंदुए को मुख्य वन्यजीव वार्डन एसके उपाध्याय के कहने पर सफारी में लाया गया था।

इनसेट-
शेड्यूल -1 श्रेणी का था तेंदुआ
इटावा। तेंदुआ शेड्यूल-1 श्रेणी का था। डॉ. गौरव के अनुसार एक शेडयूल के इस तेंदुए की अहमियत बब्बर शेरों की ही तरह है। इससे पूर्व भी खेत में लगे तारों में छोड़े गए करंट से दो तेंदुओं की मौत हो चुकी है। इस लिए यह मामला गंभीर है।

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प्रभारी डायरेक्टर दिन भर छुपाते तेंदुए की मौत
इटावा। इटावा सफारी पार्क के डायरेक्टर पीपी सिंह के अवकाश पर होने से प्रभार डिप्टी डायरेक्टर अखिलेश जायसवाल देख रहे हैं। दोपहर उनसे तेंदुए के संबंध में मोबाइल पर जानकारी ली तो बताया कि तेंदुए को जंगल में छोड़ने की तैयारी चल रही है। इसके बाद उन्होंने दिन भर कोई काल रिसीव नहीं की। रात को उन्होंने तेंदुए की मौत की बात को स्वीकारा।

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दोनों की जानकारी अलग-अलग
इटावा। बातचीत में जहां डा. गौरव ने बताया कि तेंदुए का इलाज सफारी पार्क के लेपर्ड सफारी के क्वारनटाइन हाउस में चल रहा था और उसे पशु अस्पताल के आसपास भी नहीं ले जाया गया। जबकि प्रभारी डायरेक्टर अखिलेश कुमार जायसवाल ने फोन पर बताया कि तेंदुए को वेटनरी हास्पीटल के क्वारनटाइन में रखकर इलाज किया जा रहा था। लेपर्ड सफारी अभी तैयार नहीं है।
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