न बिजली का बिल देने का झंझट और न ही डीजल पर धन खर्च की जरूरत, जी हां अब किसानाें के खेतों में फसलें सोलर पंपों के जरिए लहलहाएंगी।
सरकार ने सोलर पंपों के जरिए खेतों की सिंचाई करने के लिए अनुदान की भी व्यवस्था की है। अनुदान पर मिलने वाले सोलर पंपों के प्रति किसान आकर्षित भी होने लगे हैं।
हालांकि अभी इसकी शुरूआत है। जैसे जैसे किसानों को इसकी जानकारी हो रही है। वैसे वैसे किसान धन की व्यवस्था करके सोलर पंप लगवाने की जुगत में लग गए हैं।
जिले के बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए बिजली व डीजल पर आश्रित हैं। क्योंकि उनके क्षेत्रों में सिंचाई के साधन के रूप में नहरें नहीं हैं। ऐसे स्थानों पर फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को बिजली के बिल अथवा डीजल के लिए धन का व्यय करना पड़ता है। जिससे फसल की लागत बढ़ जाती है।
मगर सरकार ने सोलर पंपों के जरिए सिंचाई की सुविधा देनी शुरू कर दी है। सरकार ने किसानों को अनुदान पर सोलर पंप लगवाने के लिए प्रोत्साहित किया है। सोलर पंप लगाने के लिए बाहर की दो कम्पनियों को इसका ठेका दिया गया है। जिले के करीब चालीस किसानों ने सोलर पंप लगवाने के लिए आवेदन किया था ।
इसमें से बीस किसानों के पंप लगाए जा चुके हैं। जो पंप लगाए गए हैं वह सही तरीके से काम कर रहे हैं। बिना बिजली व डीजल का खर्च उठाए किसान इन पंपों से अपने फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। जिले में दो तीन व पांच एचपी के सोलर पंप लगाए जा रहे हैं।
दो एचपी का पंप लगाने के लिए किसानों को साठ हजार दो सौ पचहत्तर रुपए, तीन एचपी के पंप के लिए एक लाख सत्रह हजार दो सौ रुपये व पांच एचपी के पंप के लिए दो लाख पैंसठ हजार छह सौ रुपए जमा करने पड़ते हैं। बाकी का खर्चा सरकार द्वारा वहन किया जाता है।
सोलर पंप के लिए किसानों को उप कृषि निदेशक के यहां आवेदन करना होगा। इसके बाद जितने पावर का सोलर पंप लगवाना है उसकी धनराशि का बैंक ड्राफ्ट देना होगा।
इसके बाद ही सोलर पंप लगाने की विभागीय स्तर से कार्यवाही शुरू हो जाती है। इसमें किसानों के पास स्वयं की बोरिंग होना अनिवार्य है। सोलर पंप लगाने क ा कार्य दो कंपनियों द्वारा किया जा रहा है।
इसमें तीन एचपी के सोलर पंप लगाने के लिए जैन इर्रीगेशन सिस्टम जलगांव गुजरात तथा दो एचपी और पांच एचपी के सोलर पंप लगाने के लिए प्रीमियर सोलर सिस्टम प्रा. लि. हैदराबाद को सरकार द्वारा अधिकृत किया गया है।