राजेंद्र को लॉकडाउन के दौरान मजदूरी का काम नहीं मिल रहा था। वह कई जगह काम की तलाश में गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। घर की माली हालत बिगड़ती देख वह परेशान हो गया। जिसके बाद उसने मौत को गले लगा लिया।
इटावा जिले में बसरेहर थाना क्षेत्र के नगला बाबा गांव में कोरोना काल में काम नहीं मिल पाने पर मजदूर राजेंद्र कुमार उर्फ सप्पू लाल बाथम (40) ने पेड़ के सहारे अंगोछे से फांसी लगाकर जान दे दी। नगवा बाबा गांव निवासी रामसेवक का बेटा राजेंद्र मजदूरी करके परिवार का पेट भरता था।
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परिजनों का कहना है कि राजेंद्र को लॉकडाउन के दौरान के मजदूरी का काम नहीं मिल रहा था। वह कई जगह काम की तलाश में गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इधर, दिन पर दिन घर की माली हालत बिगड़ती देख वह परेशान हो गया। आर्थिक तंगी की वजह से घर में कलह भी होती थी।
इससे वह और तनाव में रहता था। मंगलवार की रात राजेंद्र चुपचाप घर से निकल गया। गांव के बाहर सुरेश चंद्र दुबे के बाग में जाकर नीम के पेड़ से फांसी लगा ली। बुधवार की सुबह कुछ महिलाओं की निगाह पेड़ पर फांसी पर लटक रहे राजेंद्र पर पड़ी।
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उन लोगों ने राजेंद्र के परिजनों व पुलिस को घटना की जानकारी दी। थाना प्रभारी चंद्रदेव यादव के मुताबिक राजेंद्र ने घरेलू कलह से तंग आकर खुदकुशी की है। उसे लॉकडाउन के चलते काम न मिलने की बात सामने आई है। मामले की जांच की जा रही है।