महेवा कस्बा के वनदेवी नारायण स्वर्ग आश्रम पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा में के दौरान गुरुवार को कथावाचक श्रीकृष्ण अवतार पाठक ने श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनाई। कथा सुनकर पंडाल में मौजूद लोग झूम उठे।
उधर गांव बहेड़ा में चल रही भागवत कथा में गुरुवार को कथावाचक साध्वी डा. विशेवश्वरी देवी रामकृपा धाम हरिद्वार ने उपस्थित श्रद्धालुओं को परमात्मा के तीन स्वरूपों के बारे में बताया।
वनदेवी नारायण स्वर्ग आश्रम पर श्रीमद्भागवत कथा में व्यास एवं सरसकथा वाचक श्री पाठक ने कृष्ण जन्म की कथा सुनाते हुए बताया कि कंस के राज्य में अत्याचार और अनाचार इतना बढ़ गया जिससे ऋषि मुनि देवता सभी त्रस्त हो गए।
पृथ्वी माता इन आतताइयों का भार सहनें से व्यथित होकर गाय का रूप बनाकर श्री हरि विष्णु के पास याचना करने लगी। तब श्री हरि पृथ्वी पर ऋषि मुनि पृथ्वी माता की रक्षा तथा धर्म की स्थापना के लिए व देवकी व वासुदेव का वरदान सिद्ध करने के लिए मथुरा में देवकी माता के यहां अवतरित हुए।
श्रीकृष्ण का जन्म होते ही पंडाल में पुष्प वर्षा होने लगी। व्यास जी ने बताया कि जैसे ही वासुदेव कृष्ण को मथुरा लेकर चले तो बादल श्री हरि के दर्शन को आ गए और घनघोर वर्षा होने लगी। आश्रम की संचालिका मीरा देवी सरस्वती ने क्षेत्र वासियों से अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण कर जीवन सफल बनाने का आह्वान किया।
उधर क्षेत्र के गांव बहेड़ा में गुरुवार को कथावाचक साध्वी डा. विशेवश्वरी देवी रामकृपा धाम हरिद्वार ने भागवत कथा का उद्देश्य और उसका महत्व बताते हुए परमात्मा के तीन स्वरूप शत, चीत और आनंद के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि सत्य प्रकट रूप से सर्वत्र है, चीत मोन तथा आनंद अप्रकट है। जड़ वस्तुओं में शत तथा चीत है, परंतु आनंद नहीं है। जीव में शत और चीत प्रकट है, परंतु आनंद अप्रकट रहता है। मनुष्य, नारी, देह, धन संपत्ति आदि में आनंद खोजता है। कथा सुनने के लिए पंडाल में भारी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।