थाना क्षेत्र के फुलरई गांव से छह साल के बच्चे को पांच दिन पहले अगवा करके दस लाख रुपये की फिरौती मांगने वाले छह बदमाशों को पुलिस ने मंगलवार रात को मुठभेड़ में दबोच लिया।
पुलिस ने बच्चे को बदमाशों के चुंगल से सकुशल छुड़ा कर परिजनों के सुपुर्द कर दिया। बुधवार को एसएसपी आकाश तोमर ने बताया कि गांव के तीन युवकों ने अपहरण की साजिश रची थी।
पकड़े गए बदमाशों के कब्जे से स्विफ्ट कार, चाकू, तमंचा और कारतूस बरामद किए गए हैं। आरोपियों ने इंटरनेट कॉल के जरिए फिरौती की मांग की थी। रकम का झांसा देकर पुलिस ने उन्हें जाल में फंसाया गया था।
फुलरई गांव निवासी किसान रामवीर सिंह का बेटा देव सिंह उर्फ हैप्पी 26 जून को दोपहर करीब 2 बजे घर के बाहर खेल रहा था। तभी गांव का ही कल्याण पुत्र कमलेश और मनमोहन उर्फ मोनू पुत्र स्व. ब्रजेश उसे बहला फुसलाकर बाइक से अगवा कर ले गए थे।
थाना प्रभारी निरीक्षक अंजन कुमार सिंह ने बताया कि दोनों अपहरणकर्ताओं ने बच्चे को हाईवे पर ले जाकर गांव के ही गैंग सरगना मास्टर माइंड और कल्याण के भाई ओसपाल सिंह पुत्र कमलेश बघेल को सौंप दिया था।
हाईवे पर ओसपाल अपने दो अन्य साथियों आगरा के एत्मादपुर थाना के पिपरिया गांव के विष्णु पुत्र राधेश्याम प्रजापति और जयकिशन पुत्र सुनहरी लाल के साथ एक अन्य बाइक पर मौजूद था।
ये पांचों अपहर्ता बाइक से बच्चे को लेकर एत्मादपुर के ही धरेरा गांव में रवींद्र प्रताप तोमर पुत्र स्व. ओमवीर सिंह के यहां पहुंचे थे। मास्टर माइंड ओसपाल ने हैप्पी को रवींद्र के सुपुर्द उसकी देखभाल और खाना खर्चा के तौर पर दस हजार रुपये दिए थे।
बच्चे को ठिकाने तक पहुंचाने के बाद 27 जून को मास्टर माइंड ने वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) यानी इंटरनेट के जरिये हैप्पी के पिता रामवीर को फोन कर 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी।
रकम आगरा एत्मादपुर लेकर आने को कहा था। साथ ही धमकी दी थी कि रकम न दी और पुलिस को बताया तो बच्चे की हत्या कर देंगे।
परेशान रामवीर ने थाना पुलिस से गुहार लगाई। जसवंतनगर थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज कर एसएसपी आकाश तोमर के निर्देश पर थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें खोजबीन में लगाई गईं।
मंगलवार रात पुलिस को खबर लगी कि अपहरणकर्ता स्विफ्ट डिजायर गाड़ी से चित्राहाट आगरा की ओर से फिरौती की रकम लेने कचौरा रोड पर जसोहन की बगिया के पास आ रहे हैं। पुलिस ने लखेरा कुंआ तिराहे पर वाहन चेकिंग शुरू की। कार के आने पर पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन चालक ने गाड़ी भगा दी।
पुलिस ने पीछा किया तो कार जसोहन बगिया चौराहे पर बनी मजार से टकरा गई। पुलिस से घिरा हुआ देख अपहर्ताओं ने तमंचों से फायर किए। जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने सभी छह अपहर्ताओं को दबोच लिया और कार में बैठे मासूम हैप्पी को सकुशल बरामद कर लिया।
एसएसपी आकाश तोमर ने टीम में शामिल जसवंतनगर थाना प्रभारी निरीक्षक अंजन कुमार सिंह, कर्मवीर सिंह तालान, उप निरीक्षक जगपाल सिंह, सनत कुमार, क्राइम ब्रांच प्रभारी सत्येंद्र यादव, सर्विलांस प्रभारी वीके सिंह आदि को घटना का खुलासा करने पर 25 हजार रुपये इनाम की घोषणा की है।
अपहरणकर्ता बच्चे को रोने नहीं देना चाहते थे। इससे उन्हें भंडाफोड़ होने की आशंका थी। लिहाजा मासूम बालक जब भी घर जाने की जिद पकड़ता और रोना शुरू करता तो अपहर्ता उसे बिस्कुट, माजा, आम आदि खाने पीने की चीजें देकर बहला देते थे।
उसे लगातार आश्वस्त कर रहे थे कि जल्द ही उसको माता-पिता के पास ले जाएंगे। मां मंजूदेवी ने बताया कि 26 जून को जब उनका बेटा घर नहीं आया तो आसपास क्षेत्र में काफी खोजबीन की। लेकिन वह कहीं नहीं मिला था।
मास्टर माइंड ओसपाल ने इस पूरे घटनाक्रम को अंजाम देने के लिए सबसे पहले अपने भाई कल्याण और गांव के ही मोनू को राजी किया।
बच्चे को अगवा कर हाईवे पर सौंपने के लिए उसने भाई को पांच हजार रुपये भी दिए थे। यह भरोसा भी दिया था कि फिरौती की रकम मिलने पर दोनों को 25-25 हजार रुपये और देगा।
अपहर्ताओं ने धमकी दी थी कि यदि बच्चे के बारे में पुलिस को बताया तो उसकी हत्या कर देंगे। इससे परिजन बेहद डरे हुए थे। जब मुकदमा दर्ज हुआ तो किसान रामवीर ने घटना को प्रकाशित न करने का भी सभी से आग्रह किया था।
उनका कहना था कि इससे उनके बच्चे की जिंदगी पर खतरा पैदा हो जाएगा। क्योंकि खबर छपने पर अपहर्ताओं तक इसकी सूचना पहुंच सकती है। पुलिस ने भी बेहद गुपचुप ढंग से अपनी छानबीन जारी रखी।