अपर सत्र न्यायाधीश डा. विदुषी सिंह ने हत्या के एक मामले में सुनवाई करते हुए दो महिलाओं समेत तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक को बीस बीस हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी रामनाथ ने 10 अप्रैल 2007 ने सिविललाइन थाने में मामला दर्ज कराया कि उसकी पुत्री विमला देवी की शादी गयाप्रसाद पुत्र प्रेमसिंह निवासी लुहन्ना के साथ हुई थी। कुछ समय पूर्व उसके दामाद गयाप्रसाद ने विमलादेवी पर झूठा आरोप लगाकर मारपीट करने लगा।
9 अप्रैल को गयाप्रसाद, जसोदा देवी व मिंटू पत्नी केशव ने विमला देवी को छत से नीचे गिराकर मार डाला। पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना की। विवेचना के उपरांत मामला सुनवाई के लिए अपर सत्र न्यायाधीश डा. विदुषी सिंह के न्यायालय में पहुंचा। जहां गवाहों के बयान और साक्ष्यों के प्रस्तुत होने के बाद शासकीय अधिवक्ता प्रवीण कठेरिया अपने तर्कों के जरिए वाद को सिद्घ करने में सफल रहे।
न्यायाधीश डा. विदुषा सिंह ने गयाप्रसाद, उसकी मां जसोदी देवी तथा बहन मिंटू को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही बीस बीस हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।