पर्यूषण पर्व के समापन पर नगर के समस्त जैन मंदिरों में क्षमावाणी पर्व मनाया गया। सभी साधर्मियों ने एक दूसरे से क्षमा मांगते हुए उत्तम क्षमा पर्व मनाया। बड़ो ने भी परंपरा निभाते हुए छोटों को माफ किया और गिले शिकवे भूलकर अपने हृदय से लगाया।
लालपुरा स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार रात 8 बजे से क्षमावाणी पर्व का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पीडब्ल्यूडी इंजीनियर सुभाष जैन उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि भूल होना प्रकृति है, उसे मान लेना संस्कृति है और उसे सुधार लेना प्रगति है।
क्षमा याचना मांगते हुए क्षमावणी पर्व मनाया। महेश चन्द्र जैन ने कहा कि जैन धर्म में क्षमावणी विशेष पर्वों में से एक है। उन्होंने क्षमा की संज्ञा भगवान महावीर की आभूषण से की। अध्यक्षता करते हुए पूर्व चेयरमैन प्रेमचन्द्र जैन ने कहा कि सनातन, जैन, इस्लाम, सिख, ईसाई, सभी धर्म एक ही बात बताते हैं कि एक दिन सभी को मिटना है।
अत: परस्पर मिठास बनाए रखें। मिट जाना ही संसार का नियम है। संजू जैन, अनिल अंहिसा, आकाशदीप जैन, राकेश एलआईसी, मनोज जैन, महावीर प्रसाद जैन, राकेश कुमार जैन ने भी अपने विचारों को प्रकट किया। कार्यक्रम समापन के बाद महिला, पुरुष, वृद्ध, बच्चों, युवाओं, युवतियां ने एक दूजे से सिर झुकाकर क्षमा मांगी और बड़ों से आशीर्वाद प्राप्त किया।