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सेस सूची में कई परिवारों के नाम गायब

Mon, 23 Feb 2015 11:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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अप्रैल माह से पूरी संभावना है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू हो जाए। इस अधिनियम में गरीबाें को ही सस्ते दर पर राशन मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों सर्वे चल रहा है। सर्वे में एक अड़चन आ रही है। एनआईसी (नेशनल इन्फारमैटिक सेंटर लखनऊ) से जो सर्वे सोशियो इकोनॉमिक एंड कास्ट सेंसस (सेस डाटा) भेजा गया है, उसमें काफी परिवारों के नाम ही शामिल नहीं है। अब सूची से गायब परिवारों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
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आने वाले समय में जिले की कुल आबादी के 79.56 फीसदी ग्रामीण और 64.43 प्रतिशत शहरी ही सस्ती दरों पर राशन पाएंगे। पूर्ति विभाग को वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर एनआईसी लखनऊ से तीन कैटेगरी में आबादी/परिवारों की सूची उपलब्ध कराई गई है।

इस सूची का सत्यापन किया जा रहा है। यह कार्य 10 मार्च तक होना है। सामाजिक आर्थिक और जातीय गणना (सेस) सूची से कराया जा रहा है। सत्यापन के जरिए ही इस सूची की हकीकत परखी जानी है। उसके बाद ही खाद्य सुरक्षा के दायरे में आने वालों की सूची तैयार होगी।
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चूंकि एनआईसी लखनऊ से सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र का ही डाटा प्राप्त हुआ है, लिहाजा सर्वे कार्य भी सिर्फ गांवों में हो रहा है। कई ग्राम पंचायतों में लोगों की शिकायतें मिल रही हैं कि इस सूची में कई परिवारों के नाम छूटे हुए हैं। ऐसे परिवारों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिसकी उन्हें जानकारी नहीं है और न इसके बारे में प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

राशन कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन करें
शहरी क्षेत्र के गरीब व अमीर परिवारों का कोई डाटा एनआईसी से भेजा नहीं गया है। इसे पूर्ति विभाग को ही तैयार करना है। लिहाजा विभागीय स्तर पर शहरी क्षेत्र के परिवारों को सूचित किया जा रहा है कि जिन परिवारों ने पूर्व में राशनकार्ड के लिए कोई फार्म भरकर जमा नहीं किया है और उनका राशनकार्ड का विवरण कंप्यूटर में फीड नहीं हुआ है वे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

इसे वे तत्काल पूरा करा लें। अन्यथा वेबसाइट बंद भी हो सकती है। खास बात यह कि राशनकार्ड में अब परिवार की मुखिया महिला होगी। आवेदन करते समय महिला मुखिया की फोटो, आधारकार्ड, वोटर कार्ड, बैंक की पासबुक एवं मोबाइल नंबर दर्ज कराना अनिवार्य होगा। जिन परिवारों में कोई महिला नहीं है। उस परिवार के वरिष्ठतम पुरुष को मुखिया बनाया जा सकता है।

जिला पूर्ति अधिकारी सत्यवीर सिंह के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र में सर्वे करने वाले कर्मचारियों को सेस डाटा उपलब्ध कराया गया है। कुछ ग्राम पंचायतों से इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं कि कई परिवारों के नाम इसमें शामिल नहीं हैं।

ऐसे परिवार लोकवाणी या जनसेवा केंद्रों के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यहीं नहीं सेस डाटा में परिवारों की जो स्थिति दी गई है, उस पर भी सर्वे करने वाले कर्मचारी, नोडल अधिकारी और बीडीओ स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।
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