फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अभभिवक रुचि लें तो खेलों में आगे बढ़े देश

विज्ञापन
विज्ञापन
इटावा। एक खेल आयोजन में बच्चों की हौसला अफजाई करने आए अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दीपक ठाकुर ने कहा कि देश में खेलों में माहौल बन रहा है, सुविधाएं और खिलाड़ियों के लिए नौकरियां भी बढ़ी हैं। अगर अभिभावक रुचि लेने लगें तो खेलों के क्षेत्र में दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत की झोली भी मेडलों से भर जाए।
विज्ञापन

अर्जुन अवार्ड विजेता दीपक ठाकुर ने देश को कई मेडल दिए हैं। वर्ष 2003 में एशिया कप में स्वर्ण जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे दीपक के खाते में एफ्रो एशियन गेम्स का भी स्वर्ण आया था। 2000, 2004 के ओलंपिक, 2002 और 2010 के वर्ल्ड कप में भी उन्होंने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया है। एशियन गेम्स, जूनियर
विश्वकप समेत कई प्रतियोगिताएं खेल चुके दीपक का कहना है कि प्रतिभाएं उन्हीं खेलों की ओर भागती हैं जिनमें पैसा और भविष्य सुरक्षित दिखता है। कोई भी युवा 10 से 12 साल तक ही खेलता है, उसके बाद जिंदगी में क्या करेगा, ये सोच कर युवा खेल चुनते हैं। मीडिया और कार्पोरेट घराने जिस तरह क्रिकेट और बैडमिंटन को प्रोत्साहन देते हैं, उसी तरह अन्य खेलों को भी देना चाहिए। कहा कि भारत में हॉकी लीग शुरू हुई थी लेकिन किसी कारणों से चल नहीं पाई।
विज्ञापन

दुनिया के कई छोटे देश भारत की अपेक्षा खेलों में बहुत आगे हैं, इस सवाल पर दीपक ने कहा कि उन देशों में माता पिता चार से पांच साल के बच्चे को लेकर खुद मैदान पर जाते हैं। छोटी सी उम्र में ही उसे खेलों में डाल देते हैं। कोच से उसके इंप्रूवमेंट के बारे में बराबर पूछते रहते हैं। किंतु हमारे यहां 10 साल के बाद बच्चा खेल मैदान
पर जाता है, वह भी खुद में ललक होने पर। अभिभावक बच्चों को खेलों की ओर करियर बनाने पर कोई जोर नहीं देते। अगर अभिभावक बच्चों को खेलों की ओर बढ़ाने लगेें और घर से ही खेल का मालौल बने तो निश्चित ही ढेरों मेडल आएंगे। दीपक ने कहा कि पहले की अपेक्षा देश में सुविधाएं बहुत बढ़ी हैं। हॉकी में ही देख लें, सिंथेटिक ट्रैक, इंडोर स्टेडियम छोटे छोटे जिलों में भी बन गए हैं। बस घर और स्कूलों में खेलों का माहौल बनाने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें