ग्वालियर रोड स्थित शहर के प्राचीन श्री कालीबाड़ी मंदिर परिसर में रविवार को नवनिर्मित शिवशक्ति मंदिर में मूर्ति स्थापना कार्यक्रम शुरू हो गया।
धार्मिक अनुष्ठान के तहत पहले कालीबाड़ी मंदिर से कलश यात्रा निकाली गई और मंदिर में स्थापित होने वाली प्रतिमाओं को जलाधिवास कराया गया। इस विधान के साथ ही मंदिर परिसर में सोमवार से शतचंडी पाठ भी शुरू होगा। माता के नौ रूपों व द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्थापना 26 जनवरी को की जाएगी।
श्री कालीबाड़ी मंदिर जिले का प्राचीन शक्ति स्थल है। यहां पर माता दक्षिणेश्वरी काली की वर्षों पुरानी प्रतिमा स्थापित है। मंदिर परिसर में राम दरबार, सिद्धि विनायक गणेश, कृष्णा-राधा व सांई नाथ महाराज के मंदिर अलग अलग बने हैं। मंदिर के महंत स्वामी शिवानंद महाराज ने मंदिर परिसर में ही शिव-शक्ति मंदिर का निर्माण भी कराया है।
इस मंदिर में प्रतिमाओं की स्थापना के लिए रविवार से कार्यक्रम शुरू हो गए हैं। आचार्य मनोज महाराज के साथ पं. सुभाष चतुर्वेदी, पं. देवेंद्र कुमार शास्त्री, पं. संजय दुबे, पं. अनुरुद्ध समाधिया, पं. सुभाष शास्त्री ने सबसे पहले कलश पूजन कराया। इसके बाद कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा के बाद भगवान गणेश के पूजन-अर्चन के साथ वेदी पूजन भी कराया गया।
मंदिर में स्थापित होने वाली नव दुर्गा, शिव परिवार, हनुमान जी, भैरव बाबा व देवी जी के दो शेरों को संगम, मंदाकिनी, हरिद्वार, अलकनंदा, समुद्र आदि तीर्थों के जल से जलाधिवास कराया गया। पूजन-अर्चन मंदिर के महंत स्वामी शिवानंद महाराज के साथ राघवेंद्र पोरवाल व उनके परिवारीजनों ने किया।
सोमवार को सभी प्रतिमाओं का अन्नाधिवास कराया जाएगा और शतचंडी पाठ भी शुरू होगा। मूर्ति स्थापना कार्यक्रम को लेकर पूरे मंदिर परिसर को बिजली की झालरों व फूलों से सजाया गया है।