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उर्दू हूं, मुझमें खुशबू अमन-ओ-अमान की...

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इटावा। इटावा महोत्सव/प्रदर्शनी पंडाल में बुधवार की देर रात हए मुुशायरे में शायरों ने एक से बढ़कर एक शायरी सुनाकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया आगाज शायर साबिर इटावी ने उर्दू हूं मुझमें खुशबू अमन-ओ-अमान की, मासूम सी बहन हूं मैं हिंदी जुबान की सुनाकर किया।
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मुबारक अंजुम ने पढ़ा, खून का दरिया ये अश्कों का समंदर कैसा, अपने रहबर की बगल में ये खंजर कैसा। नदीम एडवोकेट ने पढ़ा, नोके खंजर पे खून मिला ही नहीं, आस्तीन का लहू दिखा ही नहीं।
रौनक इटावी ने कहा कि चिराग हाथ पे रखना तो एक बहाना था, हमें तो जोर हवाओं का आजमाना था। पूर्व मंत्री अशोक यादव ने पढ़ा, आंखों-आंखों में जाने वो क्या कह गया, इक मुसाफिर यहीं का यहीं रह गया।
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मसरूर अहमद ने पढ़ा, गैरों से शिकायत क्या है, अपनों ने सताया है, मरहम की जगह अक्सर एक जख्म लगाया है। सैयद हाशिम नईमी ने पढ़ा, चुटकी में गिरेबां का किनारा लेकर आंखों में मोहब्बत के इशारा लेकर, रोने का सलीका कोई उनसे सीखे रोते हैं।
तबस्सुम का सहारा लेकर। राजदा खातून राज ने पढ़ा, इतना आसां नहीं होता है तिरंगे का सफर, पिस के मेहंदी की तरह रंग बिखर जाता है। सूफी सत्तार कमर ने पढ़ा, खुद के किरदार को मीजान पे तौला जाए, फिर किसी और के एबों को टटोला जाए।
मोहम्मद सलीम ने कहा, हर खार से उल्फत है हर गुल हमें प्यारा है, हमने भी लहू देकर गुलशन को संवारा है। मुशायरे में हरिओम शाक्य विमल, जमाल इटावी, रियाज कलबारी, इमरान अंसारी, सुहेल अहमद, आरिफ नूर, सागर इटावी, यासीन अंसारी, तालिब इटावी ने भी कलाम पेश किया।
कार्यक्रम का आगाज सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र प्रसाद, सपा जिला उपाध्यक्ष मुबारक अली अंजुम, इंजीनियर हरि किशोर तिवारी, प्रदर्शनी कार्यकारिणी कमेटी के सदस्य सईद नकवी ने किया।
इस मौके पर फजलुर्रहमान अंसारी, तालिब कामरान, मोहम्मद साबिर, जब्बार खान, फैजान, सुनील तिवारी, शावेज नकवी, सईद नकवी, कुरैशी, इदरीस अंसारी, समी कुरैशी, नफीसुल अंसारी, जाहिद, हाजी मो. इस्माईल अंसारी व फजलुर्रहमान अंसारी आदि मौजूद रहे।
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