चकरनगर (इटावा)। राष्ट्रीय अभयारण्य क्षेत्र बीहड़ में क्वारी नदी के किनारे मृत मिले तेंदुए ही हत्या शिकारियों ने की थी। बरेली में हुए पोस्टमार्टम में तेंदुए गर्दन पर मिली अंदरूनी चोट इसी ओर इशारा कर रही है। इस घटना से सेंचुरी विभाग सतर्क होकर शिकारियों की तलाश में जुट गया है। अधिकारियों का कहना है कि लैपर्ड को जहर दिए जाने की भी आशंका है। इसकी पुष्टि के लिए विसरा रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
राष्ट्रीय अभयारण्य क्षेत्र में चकरनगर स्थित क्वारी नदी के किनारे 13 अक्टूबर को वयस्क तेंदुए का शव मिला था। अधिकारियों ने छानबीन की तो उसके शरीर पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं थे। शुरुआती जांच में अफसर आशंका जता रहे थे कि किसी बीमारी की वजह से उसकी मौत हुई होगी। लेकिन, बरेली में इसका पोस्टमार्टम करवाया गया तो जो रिपोर्ट सामने आई उससे अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। पोस्टमार्टम में लैपर्ड के गर्दन पर अंदरूनी लेकिन काफी गहरी चोट थी। इस चोट से निकला खून उसके फेफड़ों में भर गया था। यही नहीं लैपर्ड के पेट में न तो कोई खाना मिला न ही इसे पचाने वाले एंजाइम पाए गए। डॉक्टरों का कहना है कि करीब एक सप्ताह से उसे भोजन नहीं मिल पाया था। इसकी वजह से वह चोट लगने के बाद परिस्थितियों से नहीं लड़ पाया और जल्द ही मौत हो गई। (संवाद)
नदी के पास जाने से जहरखुरानी की आशंका
सेंचुरी के अफसरों का कहना है कि शिकारी खतरनाक जानवरों का शिकार करने के लिए हल्के प्रभाव वाले जहर का भी इस्तेमाल करते हैं। आशंका है कि तेंदुए को जहर देकर काबू में किया गया हो। इस दौरान शिकारियों ने किसी चीज से उसकी गर्दन पर वार कर दिया हो। होश आने पर किसी तरह लैपर्ड उनके चुंगल से छूट गया हो। जहर के असर से उसे प्यास लगी और पानी के लिए नदी की ओर भागा, लेकिन कई दिनों से भूखा होने की वजह से पानी पीने से पहले ही उसकी मौत हो गई होगी। हालांकि सेंचुरी के वार्डन दिवाकर श्रीवास्तव का कहना है कि जहां लैपर्ड का शव मिला था उससे करीब चार किलोमीटर दूर सड़क है जिस पर हर वक्त वाहन चलते हैं। हो सकता है कि तेंदुआ किसी वाहन से टकराकर चोटिल हुआ हो। उनका कहना है कि फिलहाल मामले की जांच चल रही है।
लैपर्ड का कुनबा बढ़ने के साथ शिकारियों की दस्तक
वार्डन दिवाकर श्रीवास्तव का कहना है कि चंबल इलाके का वातावरण लैपर्ड के लिए मुफीद है। यही वजह है कि बीते दो साल में यहां लैपर्ड की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। इस वक्त सेंचुरी क्षेत्र में करीब 50 से 60 वयस्क तेंदुए होने की संभावना है। लेकिन अब इन्हें संरक्षित करने की चुनौती खड़ी हो गई है। बीते कुछ महीनों में आधा दर्जन से ज्यादा तेंदुओं की रहस्यमयी मौत से शिकारियों के दस्तक की भी आशंकाएं नजर आ रही हैं। दिवाकर श्रीवास्त का कहना है कि शिकारियों पर नकेल कसने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।