विधानसभा चुनाव के दौरान सपा छोड़ने वालों पर अब हाईकमान की नजरें टेढ़ी होने लगी हैं। सपा जिलाध्यक्ष गोपाल यादव ने कहा है कि जो लोग पार्टी छोड़ चुके हैं वे अपने घरों और गाड़ियों पर सपा की नेमप्लेट हटवा दें। ऐसे लोगों को चिह्नित किया जा रहा है। चेतावनी के बाद भी सुधार न होने पर कार्रवाई की जाएगी। सपा में शीर्ष स्तर पर चले सियासी घमासान के बीच सुनील और गोपाल यादव जिलाध्यक्ष पद पर काबिज रहे।
इनमें सुनील यादव को शिवपाल सिंह और गोपाल यादव को प्रोफेसर रामगोपाल यादव का आशीर्वाद मिला। चुनाव आयोग ने जब सीएम अखिलेश यादव को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वीकार कर लिया तो सुनील ने अपनी दावेदारी समाप्त कर दी। सपा की जिले की बागडोर गोपाल यादव के हाथ में आ गई। सपा ने जब निवर्तमान विधायक रघुराज सिंह शाक्य का टिकट काट दिया तो 26 जनवरी को शिवपाल सिंह यादव समर्थकों ने सपा छोड़ने का एलान कर दिया।
उन्होंने मुलायम के लोग नाम का संगठन खड़ा कर चुनाव में सपा प्रत्याशी का विरोध भी किया। सपा हाईकमान ने अब इस मामले को गंभीरता से लिया है। विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद भितरघातियों पर अनुशासन का हंटर चल सकता है। सपा जिलाध्यक्ष गोपाल यादव ने कहा कि पार्टी के कुछ लोग सपा से इस्तीफा देने के बाद चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों में लगे रहे। ये कार्य पार्टी संविधान के विरुद्ध है। ऐसे लोगों को आगाह किया जाता है कि वे अपने आवासों एवं वाहनों से पदों की नेमप्लेटें तत्काल हटा लें। अन्यथा ऐसे लोगोें के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।