चकरनगर। पांच नदियों के संगम स्थल चकरनगर के पचनद में कार्तिक पूर्णिमा पर सैकड़ों भक्तों ने डुबकी लगाई। भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना की। मान्यता है कि पचनद में स्नान करने से पुण्य मिलता है। जीवन के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। कोरोना के चलते इस बार बहुत कम संख्या में श्रद्धालु स्नान करने पहुंचे। वहीं प्रशासन ने इस बार पचनद पर मेला की अनुमति नहीं दी। जिससे आसपास के इलाके में रौनक कम नजर आई।
भोर की बेला में क्षेत्रीय महिलाएं, बच्चे बड़ी संख्या में पैदल पचनद पहुंचे। परिसर में केवल प्रसाद, फूल पत्ती की की सीमित दुकान लगाई गई। जिससे भक्तों को पूजा-अर्चना का सामान मिष्ठान आदि खरीदा। परिसर में लोगों को एकजुट होकर बैठने नहीं दिया गया। परिसर में महिलाओं के लिए समाजसेवी संस्थानों ने सामूहिक वैकल्पिक स्नानघर तैयार किए। मेला न लगने से क्षेत्रीय मातायें बहनें निराश दिखी। उनका मानना था कि वर्ष में एक बार घरेलू उपयोग की चीजें साज सिंगार की वस्तुएं खरीदने का मौका मिलता है। क्षेत्रीय दुकानदारों ने बताया कि मेला में बिक्री से कुछ आमदनी हो जाती थी। इस वर्ष मेला न लगने से घाटा हो रहा है।
श्रवण बन को महंत बनाए जाने के लिए प्रार्थना पत्र
चकरनगर। पचनद कालेश्वर के नए महंत श्रवण बन को बनाए जाने के लिए क्षेत्रीय जनता ने प्रशासन को संयुक्त रूप से प्रार्थना पत्र भेजा है। बतादें कि पचनद महंत अश्विनी बन का मार्ग दुर्घटना में निधन हो जाने के बाद से मंदिर के महंत का कार्यवाहक अध्यक्ष किशोर बन को बना दिया है। मंदिर के महंत बनाए जाने को लेकर तमाम साधु संत अपना-अपना दावा कर रहे हैं। मंदिर के नियमानुसार महंत के ही परिवार का महंत हो सकता है। इसके बाद महंत परिवार के 14 वर्षीय बालक श्रवण बन को बनाए जाने की मांग की है।