होम आइसोलशन में रह रहे कोरोना संक्रमितों की कोई सुध नहीं ले रहा है। घरों में रह रहे संक्रमितों को न तो दवायें पहुंच रही हैं और न ही खाने पीने के सामान की कोई व्यवस्था हो रही है।
ऐसे मेें कोरोना संक्रमित आइसोलेशन तोड़कर खुद ही घरों से बाहर निकल कर सामान खरीद रहे हैं। यह स्थिति कोरोना संक्रमण के लिए काफी खतरनाक होती जा रही है।
इस दौर से गुजर चुके वरुण तिवारी, अनिल शर्मा ने बताया कि पिछले 10 दिनों में कोई जिम्मेदार यह भी पूछने नहीं आया कि दाल, सब्जी है भी या नहीं। वहीं होम आइसोेलेट 31 वर्षीय महिला मरीज ने बताया कि दो दिन से प्रधान से रोजमर्रा की चीजों के लिए कहा, पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
बताया गया कि पूर्व में जहां गली को बैरिकेडिंग करके मरीज के घर के बाहर पंफलेट व बैनर लगा दिया जाता था।
इससे लोग निकलने बैठने में सचेत रहते थे। अब जब मरीजों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है तो ऐसी स्थिति में मरीजों में जिनमें एल- 1 लक्षण दिख रहे हैं, उन्हें घरों में ही आइसोलेट किया गया है। ग्राम प्रधान व सचिव की जिम्मेदारी है कि वह जरूरत का सामान घर तक पहुंचवाए।
स्वास्थ्य विभाग की यह जिम्मेदारी है कि प्रतिदिन मरीजों का चेकअप व दवा दिलवाए। देखा जा रहा कि मरीज के घर के बाहर अब बैरिकेडिंग भी नहीं की जा रही है। मरीजों का हाल लेने वाला भी कोई नहीं है। मजबूरी में परिजनों को खुद ही निकलना पड़ रहा है।
इस बारे में जब सीएचसी अधीक्षक डॉ. यतेंद्र राजपूत ने कहा कि आशा व संबंधित क्षेत्र की एएनएम की जिम्मेदारी है कि वे मरीज ख्याल रखें। वहीं अन्य सामान की आपूर्ति नगरीय क्षेत्र में नगर पंचायत व ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत अधिकारी की जिम्मेदारी है।