नगर पालिका ने दस साल पहले सुंदरीकरण के नाम पर जिन दुकानों को गिरा दिया था उनके मालिकों की याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है।
उच्च न्यायालय ने पालिका को निर्देश दिए है कि पीड़ितों को उचित स्थान पर दुकानें दी जाएं। कोर्ट के आदेश पर अमल की कवायद शुरू हो गई है। दुकानदारों ने मंगलवार को डीएम से मिलकर अपना पक्ष रखा है तथा पालिका की सीमा में चार स्थान चिह्नित किए हैं।
गौरतलब है कि नगर पालिका ने 1996 में माल गोदाम रोड पर दोनाें ओर 51 दुकानाें का निर्माण कराकर कारोबारियों को ढाई सौ रुपये महीने किराए पर आवंटित की थीं। इसके नौ साल बाद वर्ष 2005 में सुंदरीकरण के नाम पर इन दुकानों पर बुलडोजर चलवा दिया गया।
प्रभावित दुकानदारों में कुछ को जिला अस्पताल के सामने दुकानें आवंटित कर की गई थीं लेकिन कारोबार न चलने पर कई दुकानदारों ने वहां पर दुकानें लेने से इंकार कर दिया। तब से अब तक पालिका ने पीड़ितों को न तो प्रीमियम राशि वापस की ओर न ही दुकानाें की लागत।
पीड़ित दुकानदार रामकिशोर विश्वकर्मा, वकील अहमद, हाजी हसन आदि ने इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दायिर की थी। क ोर्ट ने पालिका को आदेश दिया है कि पीड़ितों को दुकानें दी जाए।
पालिका ने इन लोगाें से डीएम के सामने 23 जून को पेश होकर अपना पक्ष रखने की गुहार लगाई है। रामकिशोर विश्वकर्मा, वकील अहमद ने गुरूतेगबहादुर सेतु के नीचे, कटरा बलसिंह गेट के सामने, एसएसपी चौराहे पर सुलभ शौचालय के बगल में, कानपुर रोड पर पक्का बाग से पहले खाली कराई गई जगह देने की मांग की है।