हाई परफार्मेंस लिक्विड क्रोमेटोग्राफी मशीन का उद्घाटन करते कुलपति डा. (ब्रिगे.) टी. प्रभाकर।
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उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के पैथालॉजी विभाग के थैलेसीमिया केयर सेंटर में स्थापित हाई परफार्मेंस लिक्विड क्रोमेटोग्राफी (एचपीएलसी) मशीन का उद्घाटन कुलपति डा. (ब्रिगे) टी. प्रभाकर ने किया। उन्होंने कहा कि देश की कुल जनसंख्या का 3.4 प्रतिशत थैलेसीमिया से ग्रस्त है। इसमें थैलेसीमिया मेजर सर्वाधिक घातक है। इसमें बच्चों को हर माह रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। एचपीएलसी मशीन की सहायता से अनुवांशिक हीमोग्लोबिन बीमारियों का पता लगाया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि बीमारी का पता चलने पर सही समय पर इलाज और काउंसलिंग शुरू की जा सकेगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में प्रतिवर्ष 7000 से 10000 थैलेसीमिया मेजर से पीड़ित बच्चों का जन्म होता है। पैथालॉजी विभाग की अध्यक्ष डा. पिंकी पांडेय ने बताया कि थैलेसीमिया अनुवांशिक बीमारी है। इसमें पीड़ित बच्चे में जन्म से रक्त नहीं बनता। इसकी पहचान जन्म के तीन माह बाद ही हो पाती है।
इसमें शरीर में रक्त की कमी (एनीमिया) के लक्षण दिखना प्रमुख है। डा. पिंकी ने बताया कि यदि माता पिता दोनों ही थैलेसीमिया के संवाहक हों तो थैलेसीमिया मेजर से ग्रस्त शिशु के जन्म होने की आशंका 25 प्रतिशत होती है। थैलेसीमिया से बचाव के लिए गर्भधारण से पूर्व रक्त परीक्षण जरूरी है। इस मौके पर पैथालॉजी विभाग की अध्यक्ष डा. पिंकी पांडेय, विश्वविद्यालय के संकाय अध्यक्ष प्रो. केएम शुक्ला, कुलसचिव जितेंद्र प्रताप सिंह, चिकित्साधीक्षक डा. (ब्रिगे) एसके गुप्ता, वित्त नियंत्रक पीएन सिंह, जेडीएमएम बलवीर सिंह, पैथालॉजी विभाग से डा. विनीत चतुर्वेदी, डा. सीमा दयाल, डा. श्रुति सिंह, डा. सविता अग्रवाल, डा. संजीव सिंह, डा. रुकइया, डा. गीता, डा. रश्मि, डा. मेघा, वरिष्ठ तकनीकी स्टाफ रंजीत प्रसाद, प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी केवी अग्रवाल, उमाशंकर, एमके दीक्षित आदि उपस्थित रहे।