इटावा। महिला अस्पताल आने वाली मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए खासकर डिलीवरी के लिए आने वाली महिलाओं से एक सहमति पत्र भरवाया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि मरीज मे खांसी, जुकाम, बुखार के पूर्व लक्षण तो नहीं है। वह दूसरे शहर अथवा राज्य से तो नहीं आई हैं। साथ ही पड़ोस के किसी व्यक्ति को खांसी, जुकाम, बुखार तो नहीं आ रहा है।
सीएमएस डा.अशोक कुमार ने बताया कि कोरोना वायरस को लेकर वह और उनका स्टाफ पूरा एहतियात बरत रहे हैं। पर्चे को सैनिटाइज किया जा रहा है। डाक्टर के पास मरीज को भेजने से पहले हाथों को सैनिटाइज करके भेज रहे हैं। डाक्टर भी उन्हें दूसरों से दूरी बनाकर रहने की सलाह दे रहे हैं। सारी जांच कराई जा रही है। अस्पताल में उठने, बैठने, दवाईयों समेत पूरे अस्पताल को सैनिटाइज करवा रहे हैं।
यह भी बताया कि कोरोना वायरस को लेकर वह काफी सतर्कता बरत रहे हैं। भर्ती मरीजों को खाना देने के अलावा उनके तीमारदार को भी खाना दिया जा रहा है ताकि वह बाहर न जाएं। यही वजह कि उनका अस्पताल फिलहाल सुरक्षित है। कोई भी संक्रमण नहीं है। इस कार्य में पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सें, सफाई कर्मी आदि का पूरा सहयोग मिल रहा है। बच्चों का टीकाकरण कराने आने वाली महिलाओं का हाथ सैनिटाइज करके बुलाने के बाद बच्चे का टीकाकरण किया जा रहा है। शुक्रवार की दोपहर 12 बजे तक 13 बच्चों का टीकाकरण हो चुका था। सीएमएस ने बताया कि 23 से 31 मार्च तक 88 डिलीवरी हुई। 3 अप्रैल को 28 ओपीडी रही। पांच महिलाएं भर्ती की गईं।
सीएमएस डा.अशोक कुमार ने कहा कि गर्भवती महिलाओं के बच्चे पर कोरोना का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। गर्भवती महिलाएं हरी सब्जियां खाएं। विटामिन सी का प्रयोग करें। सब्जियों को पकाने से पहले गुनगुने पानी से धोने के बाद पकाएं।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. राखी शर्मा ने बताया कि गर्भवती महिलाओं में प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, वह सजग रहे। बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। जहां तक हो संक्रमण से बचने का प्रयास करें और घर पर ही रहें।