औद्योगिक क्षेत्र को विकसित कराने के लिए शासन-प्रशासन के तल्ख तेवर भी काम न आए। डीएम की सक्रियता से लगने लगा था कि महानगरों की तरह जिले में भी जल्द ही औद्योगिक इकाइयां विकसित होंगी, पर नौ महीने बाद भी ऐसा हो न सका।
उद्यमियों के आगे जिलाधिकारी भी पस्त हो गए। नौ महीने में सिर्फ तीन-चार उद्यमियों ने आवंटन निरस्त होने के डर से प्लाट पर बस चहारदीवारी खड़ी कराई है। आज भी औद्योगिक क्षेत्र सराय ऐसर में धूल ही उड़ रही है।
आज से ठीक नौ महीने पहले जिस तरह जिलाधिकारी डा. नितिन बंसल ने औद्योगिक क्षेत्र सराय ऐसर को विकसित करने के लिए तेवर दिखाए थे, उससे लग रहा था कि जो इक्कीस साल में नहीं हुआ वह चार-छह माह में हो जाएगा लेकिन उद्यमियों के आगे डीएम की एक न चली और वही हुआ जो बीते 21 वर्षों में होता आया है।
यानी नौ महीने का लंबा समय गुजरने के बाद भी सराय ऐसर औद्योगिक क्षेत्र में भूमि का आवंटन लिए बैठे उद्यमियों ने औद्योगिक इकाइयां स्थापित नहीं की हैं। तीन-चार आवंटियों ने डीएम के सख्त तेवर देखकर आवंटन निरस्त होने के डर से अपने भूखंड की सिर्फ चहारदीवारी बनवा ली, शेष ने तो यह भी नहीं किया। कुल मिलाकर सराय ऐसर को इंडस्ट्रियल हब बनने की उम्मीद के बीच सपना देख रहे जिले के बेरोजगार नवजवानों को मायूसी ही हाथ लगी है।
जिला लघु उद्योग केंद्र ने करीब 21 वर्ष पहले शहर से सटे सराय ऐसर में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना बनाई थी। योजना के तहत 45 भूखंडों का आवंटन भी किया गया लेकिन आज तक औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं हो पाया। रसूखदार उद्यमियों ने भूखंड तो आसानी से हासिल कर लिए, लेकिन उद्योगों को विकसित आज तक नहीं किया। तीन-चार यूनिट छोड़कर आज भी औद्योगिक क्षेत्र वीरान और उजाड़ पड़ा हुआ है। अगर यहां फैक्ट्री लगती तो निश्चित तौर पर युवाओं को रोजगार मिलता।
सितंबर महीने में डीएम डा. नितिन बंसल ने सराय ऐसर औद्योगिक क्षेत्र को अपने संज्ञान में लिया। इसके बाद जिला उद्योग केंद्र के साथ ही आवंटियों के साथ डीएम ने बैठक की। कई बार आवंटियों को उद्योग स्थापित करने के निर्देश दिए। डीएम ने आवंटन निरस्त करने तक की चेतावनी दी लेकिन न किसी ने यूनिट लगाई और न ही डीएम की ओर से किसी का आवंटन ही निरस्त किया गया। आवंटन के वक्त अगर जरूरतमंदों को जमीन उपलब्ध कराई जाती तो जिले में भी औद्योगिक क्षेत्र काफी समय पहले ही विकसित हो चुका होता।
वर्जन
औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयां विकसित हों, इसके लिए प्रयास जारी हैं। कुछ आवंटियों ने अपनी जमीन की चहारदीवारी करा ली है, जल्द ही वह यहां यूनिट स्थापित करेंगे।
मनीष चौधरी, सहायक प्रबंधक जिला उद्योग केंद्र