नगर पालिका प्रशासन ने अब गिरते भूगर्भ जलस्तर में स्थिरता लाने के लिए एक और नई योजना तैयार की है। इससे यमुना मेें फालतू बह जाने वाला फसलों के लिए उपजाऊ यूरिया युक्त सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी को खेतों तक पहुंचाया जाए। तैयार की जा रही योजना में नगरपालिका इस पानी का विक्रय करेगी। अब यह पानी खेतों तक कैसे पहुंचे, इस पर विचार किया जा रहा है।
शहर के नालों और सीवर लाइन के पानी को उपयोगी बनाने के लिए शहर में नगर पालिका के दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित हैं। इन प्लंाटों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में उपयोगी बनाए गए पानी को यमुना नदी में छोड़ दिया जाता है, जिससे इसका कहीं भी कोई उपयोग नहीं हो पाता है। शासन की स्वच्छ भारत योजना के तहत प्रदेश के कई जनपदों में इस पानी को सिंचाई के लिए प्रयोग किया जाने लगा है, जिससे जहां एक ओर नगर निगम और नगर पालिकाओं की आय बढ़ गई है तो वहीं दूसरी ओर किसानों को सिंचाई के लिए यूरिया युक्त पानी मिलने लगा है।
इसी तर्ज पर इटावा नगर पालिका ने भी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से प्रति यमुना में बह जाने वाले लाखों लीटर पानी को खेतों तक पहुंचाने की तैयारी की है। नगर पालिका प्रशासन का मानना है कि जहां इससे एक ओर भूगर्भ जल का दोहन कम होगा। वहीं दूसरी ओर किसानों को यूरिया युक्त उपयोगी पानी मिलेगा और नगर पालिका की आय भी बढ़ेगी।
प्रतिदिन यमुना में बह जाता है 23 लाख लीटर पानी- इटावा। नालों और सीवर लाइन के पानी को उपयोगी बनाने के लिए शहर में दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित हैं, जिसमें से एक यमुना किनारे टिक्सी मंदिर के पीछे व दूसरा ऊमरी में स्थापित है, जिसमें पहले ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 13 एमएलडी व ऊमरी ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 10 एमएलडी पानी की है। प्रतिदिन प्लांटों से इतना यह पानी ओवर फ्लो होकर यमुना में चला जाता है, जिसका कोई उपयोग नहीं हो पाता।
फल-फूल की खेती क ो दूनी ताकत देता है ट्रीट किया पानी- इटावा। सीवर लाइन से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में पहुंचने वाला नाले व सीवर लाइन का गंदा पानी उपचार के बाद सिंचाई के लिए बहुउपयोगी बन जाता है। इसका कारण यह है कि ट्रीट किए गए पानी में यूरिया की मात्रा बढ़ जाती है, जो फ सल के लिए जरूरी है। खासतौर से फल फूल की खेती में यूरिया युक्त पानी की सिंचाई से पौध को दूनी ताकत मिलती है और फसल अच्छी उपज देती है। इस पानी से सिचाई करने पर अलग से फसल को यूरिया लगाने की जरूरत नहीं रह जाती।
वर्जन- वह जल्द ही इस संबंध में अन्य जनपदों से संपर्क साधेंगी और पानी को खेतों तक पहुंचाने का तरीका निकालेंगी। इसके साथ ही हर्टिकल्चर विभाग से भी इस संबंध में बात की जाएगी। नीलम चौधरी ईओ नगर पालिका।