प्रदर्शनी पंडाल में गीता जयंती कार्यक्रम का उद्घाटन करते स्वामी सत्यानंद महाराज
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भारत की स्वतंत्रता का पूरा श्रेय भागवत गीता को जाता है। जो युगावतार राष्ट्रपिता बापू के न केवल हाथ में रहती है। बल्कि उनके जीवन में समाहित थी। गीता एक बार फिर भारत को विश्वगुरु बना देगी। यह बात प्रदर्शनी महोत्सव में जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर से पधारी डॉ. सुविज्ञा अवस्थी ने गीता महोत्सव में कही। उन्होंने कहा कि गीता एक ऐसा प्रबंधन ग्रंथ है जो जीवन के प्रत्येक बिंदु पर न केवल सहायक बल्कि मार्गदर्शक सिद्ध होती है।
डा. अवस्थी ने वृंदावन से लेकर यूएस आदि देशांतर की यात्रा के संस्मरण करते हुए कहा कि विकसित देशों के नागरिक पूरी तरह भागवत गीता के सिद्धांतों को अलग-अलग शैलियों में आत्मसात करते हैं। गीता के प्रबंध तंत्र से ही भारतवर्ष भी विकसित देशों की श्रेणी में पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पाठ्यक्रम में सांख्ययोग, कर्मयोग, समत्वयोग आदि योगेश्वर श्रीकृष्ण के उपदेशों को आत्मसात कराके ही हम सुयोग्य मानव संसाधन कर सकेंगे।
गीता महोत्सव की अध्यक्षता कर रहे स्वामी सत्यानंद महाराज ने गीता के मूल सिद्धांतों को निरूपित करते हुए भगवान की आराधना तथा जाप विधा की जानकारी दी। भजन गायक प्रखर गौड़ ने सरस्वती वंदना से महोत्सव का शुभारंभ किया। सुशांत यादव ने गीता के द्वितीय अध्याय के श्लोकों का वाचन व माधव गीता के रचयिता गोविंद माधव शुक्ल ने गीता के तीसरे अध्याय का काव्यानुवाद प्रस्तुत किया। इस मौके पर आयुर्वेदाचार्य डॉ. एचके द्विवेदी, प्रदर्शनी कार्यकारिणी के सदस्य गिरिराज नारायण अग्रवाल एड, पं. ऋषिनंदन मिश्र, डॉ. भूदेव मिश्र, कैप्टन उपेंद्र पांडेय, आचार्य दिनेशानंद आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। संयोजक प्रवीण चौधरी एड. व महेशचंद्र तिवारी ने आगंतुक विद्वानों का स्वागत किया। संचालन सह संयोजक आचार्य देवेश अवस्थी ने किया। महोत्सव में सर्वश्री बृजानंद शर्मा, प्रदीप मिश्र, धर्मसिंह चौधरी, पं. रमेशचंद्र तिवारी, प्रदीप चौधरी, महेशबावू कश्यप, रामानंद आदि रहे।