जिले में पहला कोरोना पॉजिटिव 12 अप्रैल को मिला था। चौथे दिन दूसरा केस भी सामने आ गया था।
27 अप्रैल को संक्रमित की गजनेर कोविड अस्पताल से छुट्टी होने के बाद जिले में सिर्फ एककेस सक्रिय था। मई के पहले सप्ताह में दूसरे संक्रमित के तिर्वा कोविड अस्पताल से ठीक होकर आने के बाद जिले में कोरोना का कोई भी केस नहीं रह गया था।
जिला ग्रीन जोन में आने की दहलीज पर था कि 13 मई से संक्रमितों के मिलने का सिलसिला शुरू हो गया। आलम यह कि हर आने वाले महीने में संक्रमितों की संख्या बढ़ती चली गई।
अगस्त आते-आते आंकड़ा और बढ़ गया। ऐसे में सक्रिय केसों की संख्या में भी बेतहाशा बढ़ोत्तरी होती गई। 17 जुलाई को सक्रिय केसों की संख्या 80 थी। महज 21 दिन में 7 अगस्त तक सक्रिय केसों की संख्या चार गुना बढ़कर 338 हो गई है।
जिले में संक्रमितों का इलाज सैफई, जसवंतनगर तथा नारायण कालेज कोविड अस्पताल में किया जा रहा है।
7 अगस्त तक 954 संक्रमितों में से 588 ठीक हो चुके हैं। 28 की मौत हो चुकी है। शेष 338 सक्रिय हैं।