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Etawah News: दोस्तों संग मिलकर बुआ की हत्या और लूटपाट में चार को उम्रकैद

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इटावा। करीब 16 साल पहले दोस्तों के साथ मिलकर बुआ की हत्या और लूटपाट के मामले में विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) अशोक कुमार दुबे-II की अदालत ने मुख्य दोषी राजेंद्र (भतीजा) समेत चार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। भतीजे ने अपनी बहन की शादी के लिए पैसों का इंतजाम करने के इरादे से बुआ की गर्दन रेतकर हत्या की थी।
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जसवंतनगर के मोहल्ला पंसारी में रहने वाली विधवा मीरा देवी अपने घर में अकेली रहती थीं। 13 दिसंबर 2009 की सुबह जब दूधवाला नियमित समय पर दूध देने आया और दरवाजा नहीं खोला तो पड़ोसियों को अनहोनी का अंदेशा हुआ था। रिश्तेदारों के साथ ही पुलिस को सूचना दी गई। घर खोलकर देखा गया था तो मीरा देवी का शव खून से लथपथ तख्त पर पड़ा था और उनकी गर्दन कटी हुई थी।
घर से उनकी लाइसेंसी राइफल, कीमती जेवर और कुछ नकदी भी गायब थी। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करके जांच की थी। इसमें पता चला था कि मुख्य आरोपी राजेंद्र उर्फ सीटू जो मृतका मीरा देवी के घर नियमित रूप से आता-जाता था और उन्हें बुआ कहता था। पुलिस की जांच में पता चला था कि उसी ने हत्या की है। राजेंद्र उर्फ सीटू की बहन की शादी तय हो गई थी और उसे पैसों की सख्त आवश्यकता थी। इसी लालच में उसने अपने तीन अन्य दोस्तों—दीपा उर्फ दीपू, सचिन और महावीर उर्फ राहुल के साथ मिलकर लूटपाट और हत्या की योजना बनाई थी।
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वारदात वाली रात को चारों दोस्त महावीर की मांस की दुकान पर एकत्र हुए। वहीं, उन्होंने मांस काटने वाली छुरी और एक सब्बल उठाया। देर रात लगभग तीन बजे ये लोग घर के टीन शेड के रास्ते अंदर दाखिल हुए। आहट सुनकर जब मीरा देवी जागीं तो आरोपियों ने उन्हें दबोच लिया था। राजेंद्र ने उनके हाथ पकड़े, सचिन ने पैर और महावीर ने उनका मुंह दबाया था। इसके बाद, मुख्य आरोपी दीपा उर्फ दीपू ने बेरहमी से छुरी से उनकी गर्दन रेत दी थी।





हत्या के बाद आरोपी घर से सोने-चांदी के जेवर, किसान विकास पत्र और बैंक पासबुक लूट ले गए थे। पुलिस ने जब आरोपियों को गिरफ्तार किया तो उनकी निशानदेही पर लूटा गया सामान बरामद हुआ। इस बरामदगी में मृतका के पति विजयराज के नाम वाली अंगूठी और उनकी बेटी दुर्गेश नंदिनी के नाम वाली अंगूठी शामिल थी जो मुकदमे में अहम सबूत साबित हुई। हत्या में प्रयुक्त छुरी और सब्बल भी एक नाले के पास से बरामद किए गए थे।




अदालत ने गवाहों के बयानों और प्रस्तुत किए गए सबूतों के आधार पर चारों दोषियों—दीपा उर्फ दीपू, राजेंद्र उर्फ सीटू, सचिन और महावीर उर्फ राहुल को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 394 (लूट) और 411 (चोरी का माल रखना) के तहत दोषी माना। अदालत ने चारों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी पर हत्या के लिए 10-10 हजार रुपये और लूट के लिए छह-छह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। मुख्य आरोपी दीपा उर्फ दीपू को आर्म्स एक्ट के तहत तीन साल की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई है।
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