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सावन में बालू का शिवलिंग बनाकर करें पूजा

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फोटो संख्या 02 ब्रह्माणी देवी मंदिर - फोटो : ETAWHA
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ब्रह्माणी देवी मंदिर परिसर में हर साल आषाढ़ी (गुरु पूर्णिमा) पर लगने वाले पंच दिवसीय लक्खी मेला इस बार कोरोना संक्रमण को देखते हुए नहीं लगाया जाएगा। हालांकि प्रशासन के निर्देश पर मंदिर तो खोला जाएगा।
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बलरई क्षेत्र की ग्राम पंचायत नगला तौर में यमुना तलहटी स्थित प्राचीन ब्रह्माणी देवी मंदिर में मां के दर्शन करने के लिए सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, उत्तराखंड, आगरा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, भिंड और हरियाणा राज्यों के श्रद्धालु आते हैं।
मां के दर्शन करने के बाद कुछ श्रद्धालु यहां पर भंडारा भी करते हैं और ध्वज चढ़ाते हैं। लोगों का कहना है कि मां से जो मन्नत मांगी है वो पूरी हुई है।
मेले के आयोजन के संबंध में एसडीएम जसवंतनगर ज्योत्सना बंधु ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते मंदिर पर मेला न लगाने और कोई भव्य आयोजन न करने के निर्देश पुजारियों को दिए गए हैं।
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यह मंदिर प्रशासन की अनदेखी का शिकार है क्योंकि इस मंदिर की दीवारें जमींदोज होने लगी हैं और प्रशासन बेखबर है। इस मंदिर का इतिहास है कि इस मंदिर का निर्माण महाराज भदावर के पूर्वजों ने आदिकाल में कराया था।
उत्तर प्रदेश राज्य के इटावा जिले के तहसील जसवंतनगर में स्थित ब्रह्माणी देवी का मंदिर अपनी अलग ही छठा बिखेरता है। इस मंदिर का इतिहास बताता है के मां की मूर्ति हटाने का प्रयास अंग्रेजों ने किया था, लेकिन विफल रहे थे।
चौगुर्जी स्थित सिद्धपीठ प्राचीन शिव मंदिर के महंत आचार्य भुवनेश मिश्र ने शिव भक्तों से सावन में बालू का शिवलिंग बनाकर पूजा करने की अपील की है। बताया कि कोरोना की वजह से मंदिर सावन के सोमवार को बंद ही रहेगा।
लालपुरा स्थित श्री नीलकंठ मंदिर समिति के महामंत्री राजीव कुमार मिश्र ने बताया कि इस बार सावन के 5 सोमवार पड़ रहे हैं। कोरोना की वजह से मंदिर श्रद्धालुओं के लिए इस बार बंद ही रहेगा।
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