इटावा-मैनपुरी मार्ग को फोरलाइन बनाने का ठेका लेने वाली कंपनी करोड़ों का भुगतान लेकर काम अधूरा छोड़कर भाग निकली। सहायक अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग विकास सिंह ने कंपनी व उसके 12 कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई है।
इटावा-मैनपुरी मार्ग को टू लेन से फोरलेन बनाने तथा उसका सुंदरीकरण करने का ठेका मुंबई की मेसर्स बलेचा इंजीनियरिंग कंपनी को दिया गया था। कंपनी को 31 जनवरी 2013 को ठेका दिया गया था। कंपनी को मार्च 2013 से सितंबर 2014 तक मार्ग के निर्माण का काम पूरा करना था।
विभाग की ओर से कंपनी को मशीनरी खरीद के लिए एडवांस में 11 मार्च 2013 को आठ करोड़ का तथा चार करोड़ 7 लाख 30,840 रुपये का मोबिलाइजेशन के लिए भुगतान किया गया था, लेकिन कंपनी ने मशीनरी खरीद से संबंधित कोई भी बिल विभाग को नहीं दिया। कंपनी ने निर्माण का काम शुरूआत में काफी तेजी से किया, लेकिन बाद में उसे गड़बड़ी शुरू की और काम को अधूरा छोड़कर फरार हो गई।
इस संबंध में प्रांतीय खंड लोनिवि के सहायक अभियंता विकास सिंह ने बलेचा कंपनी के अलावा अनिल हरीश, जगदीश बलेचा, दिनेश हरीराम, उमेश हरीराम बलेचा निदेशकगण निवासी रुचिता टावर वर्सोवा फिरीक खंड मुंबई, प्रेमपाल कृष्णन रामचंदन, अरविंद ठक्कर, चैतन्य केशव छत्रे महाप्रबंधक, सुधीर मिश्रा प्रोजेक्ट मैनेजर, आरआर धोके गुणवत्ता व लैब प्रभारी, ज्योति राउत उप परियोजना प्रबंधक, बिल प्रभारी अनिकेत तिवारी के खिलाफ धारा 406, 420, 467 तथा 283 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई है। थानाध्यक्ष विनोद यादव ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।