प्राथमिक विद्यालय सब्दलपुर में गौरैया संरक्षण विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का कुल लब्बोलुआब यह रहा कि गौरैया विलुप्त होने की कगार पर है, इसे हर हाल में बचाना होगा। इसके लिए अभियान चलाकर लोगों को संरक्षण के लिए प्रेरित करना होगा।
साथ ही कृत्रिम नेस्ट बनाने व इस्तेमाल करने का तरीका बताया। साथ ही आह्वान किया कि हर घर में इसे लगाएं। इस दौरान विद्यालय परिसर में नेस्ट लगाया भी गया। गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि घर के आंगन में फुदकने वाली गौरैया कभी अपनी प्यारी चहचहाहट से सबका मन मोह लेती थी।
अब इनकी संख्या घटती जा रही है। सरकार इनके संरक्षण का अभियान चला रही हैं, हम सभी को इस अभियान में बढ़चढ़कर हिस्सा लेना होगा। गोष्ठी में शिक्षक प्रतिनिधि संजय कुमार त्रिपाठी ने कहा कि अब पक्के मकान बन रहे हैं, छप्पर आदि समाप्त हो गए है।
पेड़ों की अंधाधुंध कटान हो रही है। ऐसे में गौरैया अपना घोंसला कहां बनाएं। खुले में इनके अंडों एवं बच्चों को चील कौओं से खतरा होता है। यह चिड़िया घर में मौजूद कीड़ों मकोड़ों को खत्म करने में मदद करती है।
गोष्ठी में वन दरोगा बृजकिशोर यादव ने गौरैया को बचाने के लिए कृत्रिम नेस्ट बनाने के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि इस नेस्ट को दीवार या पेड़ों पर दो मीटर की ऊंचाई पर लगाकर पानी और खाने की व्यवस्था कर इन्हें बचाया जा सकता है।
इस दौरान विद्यालय के परिसर में एक कृत्रिम नेस्ट लगाया गया। इस मौके पर वन क्षेत्राधिकारी लखना रेंज वीके सिंह के अलावा विद्यालय के प्रधानाध्यापक आशुतोष तिवारी, ग्राम प्रधान सर्वेश कुमार व सर्वेश कुमार दोहरे के अलावा चंद्रमोहन, रामलखन, महेंद्र व आशुतोष तिवारी ने विचार व्यक्त किए।