इस वर्ष इटावा महोत्सव को शुभारंभ के दिन से ही महोत्सव कमेटी व
प्रशासन ने कड़े निर्देश जारी किए थे कि महोत्सव में आने वाले व्यापारियों
के दुकान की किराए की रशीद तभी काटी जाएंगी जब व उद्घाटन के दिन तक अपनी
दुकानें सजा लेंगे। ऐसा न करने पर व्यापारियों की दुकानों के अस्थाई आवंटन
भी निरस्त करने की बात भी प्रशासन ने कही थी।
कड़े निर्देशों के बाद भी
उद्घाटन के दिन महोत्सव में सिर्फ 20 प्रतिशत दुकानें ही सज सकी और महोत्सव
का शुभारंभ हो गया। उद्घाटन को दो दिन बीतने के बाद तक महोत्सव स्थल पर
सिर्फ पचास प्रतिशत तक दुकानें ही लगी। प्रशासन की पहले दिन से ही महोत्सव
में रौनक लाने की मंशा पूरी न हो सकी। मंगलवार को मौसम ने सबकुछ बेकार कर
दिया।
उखड़े तंबू, मीना बाजार में भरा पानी पहले तो तेज
अंधड़ ने ने महोत्सव में लगी दुकानों के तंबू उखाड़ दिए। उसके बाद हुई
झमाझम बारिश ने महोत्सव को भारी नुकसान पहुंचाया। तेज बारिश के बाद महोत्सव
का मीना बाजार तालाब की तरह दिखाई देने लगा। वहीं मुख्य गेट पर भी जलभराव
हो गया।
दुकानदारों के अनुसार मीना बाजार में दुकानें लगना शुरू हुई थी।
व्यापारियों का सामान खुले स्थानों पर ही रखा था। अचानक शुरू हुई तेज बारिश
से उनका सामान भीग गया। महोत्सव में दूर दराज क्षेंत्रों से से पहुंचे व्यापारियों ने दुकान लगाकर
अभी बिक्री भी नहीं चालू की थी, कि उन्हें नुकसान हो गया।
मंगलवार को
अचानक आई आंधी पानी के बारे में व्यापारी कुछ सोच पाते तब तक झमाझम बारिश
शुरू हो गई और वह अपना सामान भी सुरक्षित नहीं कर पाए। ऐसे में व्यापारियों
को शुरूआती दौर में ही घाटा पड़ गया है।
महोत्सव स्थल को जलभराव मुक्त बनाए जाने के लिए यहां पर महोत्सव कमेटी ने
फब्बारा चौक व मीना बाजार में इंटरलाकिंग का कार्य कराया है। यह कार्य अभी
हाल में ही पूरा किया गया है, लेकिन इसके बाद भी बरसात में यहां भारी
जलभराव हो गया।
इससे साफ है कि महोत्सव स्थल में किए गए निर्माण कार्य में
लापरवाही बरती गई। इंटरलाकिंग का कार्य किए जाते समय मार्गों पर जलनिकासी
की सही व्यवस्था नहीं की गई है।