अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-6 पीएम त्रिपाठी ने
हत्या के प्रयास के एक मामले में आरोपी को सात साल की सजा और 20 हजार रुपये
जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भुगतने पर आरोपी को छह माह की
अतिरिक्त सजा काटनी होगी। पूर्व में व्यतीत की गई जेल की अवधि को सजा में
समायोजित किया जाएगा।
शासन की ओर से पैरवी करने वाले इम्तियाज अहमद
अंसारी ने बताया कि 7 जुलाई 2007 को राघवेंद्र सिंह उर्फ मंटू अपने भाई
बिजेंद सिंह उर्फ चिंटू तथा जसवेंद्र सिंह को लेकर रात 8.55 बजे रेलवे
स्टेशन से अपने घर शांति कालोनी आ रहा था।
मैनपुरी फाटक पर मनोहर
भदौरिया, मनोज भदौरिया पुत्र शिशुपाल सिंह, अशोक चौहान पुत्र कमल सिंह
चौहान निवासी शांति कालोनी और विकास रावत ने घेर लिया। दोनों पर पिस्टल से
फायरिंग शुरू कर दी। राघवेंद्र सिंह को सीने में दोनो तरफ और उसके भाई
बिजेंद्र को पेट में गोली लगी थी।
सिविल लाइन पुलिस ने जसवेंद्र
सिंह की तहरीर पर सभी के खिलाफ भादिवि की धारा 307 का मामला दर्ज किया।
विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। अंसारी ने बताया
कि कोर्ट ने दोष सिद्ध पातेे हुए मनोहर भदौरिया पुत्र शिशुपाल सिंह को सात
साल की सजा सुनाई।
साथ ही 20 हजार रुपये जुर्माना भी किया है।
जुर्माना न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जेल में व्यतीत
अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।