फोटो संख्या 01-हार्वेस्टर से कटाई कराते किसान
- फोटो : ETAWHA
गेहूं की पैदावार कम होने से किसानों के चेहरों पर मायूसी छाई है। मात्र दो से ढाई क्विंटल के बीच ही गेहूं की पैदावार हो रही है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मौसम में बदलाव के चलते पैदावार पर असर हुआ है। गेहूं का दाना छोटा व पतला रह गया।
गेहूं की फसल में बाल निकलने से लेकर बाली के पकने तक आए मौसम के परिवर्तन से जो आशंका किसानों के मन में आई थी। वह सच साबित हुई। बकेवर, लखना, महेवा, निवाड़ी कला सहित समूचे क्षेत्र में गेहूं की पैदावार का मौसम के परिवर्तन का काफी विपरीत असर पड़ा है।
किसानों के खेत में गेहूं की पैदावार दो क्विंटल से तीन क्विंटल के बीच ही निकल रही है। किसानों का कहना है कि लागत तो बढ़ी है परंतु पैदावार कम होने से मुनाफा काफी कम हुआ है। जनपद में करीब 96 हजार हेक्टेअर में गेहूं की फसल थी।
फरवरी के अंतिम सप्ताह में व मार्च के प्रथम सप्ताह में अचानक मौसम में तापमान में बहुत तेज परिवर्तन हुआ था। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार उस समय गेहूं की फसल में बाली निकल रही थी। उस समय फसल के लिए अधिकतम तापमान 20 से 25 सेंटीग्रेट तक होना चाहिए था।