इटावा जिले के बसरेहर कस्बे में लगने वाले जाम से लोगों को राहत देने के लिए बन रहे बाईपास का काम किसानों ने रुकवा दिया। किसानों की मांग है कि पहले उन्हें मुआवजा दिला जाए और फिर काम कराया जाए। पीडब्ल्यूडी लखनऊ रेंज के परियोजना निदेशक ने भी किसानों को समझाने का प्रयास किया पर शाम तक वह मांगों पर अड़े रहे।
इटावा-बरेली हाईवे से होकर गुजरने वाले वाहनों के कारण कस्बे में अक्सर जाम लगा रहता है। इन वाहनों को कस्बे के बाहर से निकालने के लिए करीब चार किलोमीटर लंबा और 30 मीटर चौड़ी बाईपास बन रहा है। इसके लिए करीब 390 किसानों की जमीनों को अधिग्रहण हुआ है। इनमें करीब 250 किसानों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है।
सोमवार दोपहर करीब तीन बजे कई किसानों ने बाईपास का निर्माण कार्य रुकवा दिया। मिट्टी लेकर जा रहे डंपर के सामने बैठकर विरोध-प्रदर्शन किया। इसकी जानकारी पर पीडब्ल्यूडी लखनऊ रेंज के परियोजना निदेशक शिवम सिंह भी मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया।
किसानों ने कहा कि उनकी जमीन का जब अधिग्रहण किया गया तब उनकी फसलें आधी तैयार हो चुकी थीं। जो बाद में बर्बाद हो गईं। अभी तक उन लोगों को अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा भी नहीं दिया गया है। किसान गयादीन पांडे, जंग बहादुर खान, ताज खां, अब्दुल वहीद, छक्कन, छोटे लाल, मोहम्मद इशाक, अर्जुन सिंह, मोहम्मद शमशुद्दीन, छोटे पाल, गौरव मिश्रा आदि किसानों ने कहा कि पहले उन लोगों को मुआवजा दिया जाए और इसके बाद निर्माण कार्य शुरू करें।
किसानों ने कहा कि पहले भी दो बार उन लोगों ने काम रुकवाया था। तब भी मुआवजा जल्द दिलाने का आश्वासन दिया गया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। परियोजना निदेशक ने बताया कि किसानों को समझाने का प्रयास किया गया पर वह मान नहीं रहे हैं। अब एडीएम से बात कर समस्या का समाधान निकाला जाएगा।
बसरेहर में किसानों को समझाते परियोजना निदेशक शिवम सिंह।