गेहूं की सरकारी खरीद पटरी पर आती नजर नहीं आ रही। महज एक पखवाड़ा बचा है और अभी लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 14.36 प्रतिशत खरीद संभव हो पाई है। प्रशासनिक कवायद पूरी तरह से निरर्थक साबित हुई है। खुले बाजार में सरकारी समर्थन मूल्य से अधिक रेट मिलने से किसानों ने क्रय केंद्रों का रुख करना बंद कर दिया है। केंद्र प्रभारियों की मानें तो बड़े काश्तकारों ने गेहूं स्टॉक कर लिया है।
इस बार गेहूं की सरकारी खरीद लक्ष्य के न्यूनतम स्तर पर है। जिले में 46 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जानी है।
मंगलवार तक 6604.16 मीट्रिक टन खरीद हो पाई है। जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 19764.15 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका था। जाहिर है कि इस बार 25 फीसदी लक्ष्य पूर्ति होती नजर नहीं आ रही। क्रय केंद्रों के हालात बेहद बदतर हैं। जिले में पहली अप्रैल से खरीद शुरू हुई है और इसके लिए कुल 88 खरीद केंद्र बनाए गए हैं। लेकिन दो माह में सिर्फ 2855 किसानों ने ही गेहूं क्रय केंद्रों पर बेचा है।
गेहूं खरीद की इस किल्लत को लेकर प्रशासनिक स्तर पर मोबाइल खरीद के भी प्रयास भी हुए। केंद्र प्रभारियों से लेकर खाद्य विभाग के डिप्टी आरएमओ तक ने गांवों में जाकर किसानों को क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए आग्रह किया लेकिन नतीजा सिफर रहा। केंद्र प्रभारियों की मानें तो किसान वादा करके मुकर रहे हैं। इसकी वजह भी साफ है। एक तो इस बार गेहूं की फसल भी ओलावृष्टि के चलते प्रभावित हुई है। दूसरी ओर खुले बाजार में सरकारी समर्थन मूल्य से अधिक रेट चल रहा है। किसानों को उम्मीद है कि अभी रेट में और इजाफा हो सकता है। जिसके चलते बड़े काश्तकारों ने अपना गेहूं स्टॉक कर लिया है।