फोटो 24::: इकदिल क्षेत्र में नकली तरल यूरिया बनाने वाली एक फैक्टरी में रखी खाली बाल्टी। संवाद
फोटो 25::: नकली तरल यूरिया बनाने के एक फैक्ट्री में रखा कच्चा माल। संवाद
एक्सक्लूसिव
औरैया, मैनपुरी सहित आसपास के जिलों में भी खपाई जा रही नकली तरल यूरिया
क्रासर
- इटावा में नेशनल हाईवे के किनारे चल रहा नकली यूरिया को असली बताकर बेचने का खेल
- फुटकर में 700 से 800 और थोक में सिर्फ 400 से 500 रुपये में मिल जाती 20 लीटर की बाल्टी
ऋषि तिवारी
इटावा। आगरा-कानपुर नेशनल हाईवे पर शहर से लेकर इकदिल तक नकली तरल यूरिया (डीईएफ) बनाकर बेचने का खेल चल रहा है। हाईवे किनारे स्थित ढाबों और अवैध गोदामों से नकली यूरिया की खेप न केवल इटावा ही नहीं आसपास के जिलों में फैला है। प्रशासन की नाक के नीचे यह अवैध कारोबार आज से नहीं बीते तीन वर्षों से चल रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम सिर्फ खानापूरी की जाती है। हालांकि शुक्रवार को तीन फैक्टियों पर कार्रवाई के बाद अब पुलिस ने इस नेटवर्क को अन्य जनपदों में भी तलाशना शुरू कर दिया है।
नेशनल हाईवे पर जसवंतनगर से महेवा तक 45 किमी की दूरी में लगभग 60 दुकानों पर अवैध रूप से तरल यूरिया का बेचे जाने का खेल चल रहा है। सबसे ज्यादा तरल यूरिया का काला खेल इटावा शहर से इकदिल के बीच फल-फूल रहा है। हाईवे किनारे स्थित कई छोटे ढाबों और रिपेयरिंग दुकानों पर ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली घोल बेचा जा रहा है। इसके साथ ही इसमें शामिल सदस्य रात के अंधेरे में खाली गैलनों में यूरिया और पानी का मिश्रण भरकर उन्हें नामी कंपनियों की फर्जी सील लगाकर तैयार करते हैं। इन दुकानों पर हर दिन फुटकर में लगभग 150 बाल्टियों की आपूर्ति हो रही है, जबकि जिन फैक्टरियों में यह माल तैयार हो रहा है वहां से औरैया, मैनपुरी और फिरोजाबाद सहित भिंड तक आपूर्ति की जाती है। तरल यूरिया कारोबार से जुड़े सूत्र बताते है कि फुटकर में नकली तरल यूरिया 20 लीटर की बाल्टी 700 से 800 रुपये में बेची जाती है जबकि यही बाल्टी थोक में सिर्फ 400 से 500 रुपये में बेची जाती है। बाजार में असली बाल्टी की कीमत 1000 से 1300 रुपये प्रति 20 लीटर होती है।
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बीते वर्ष भी पकड़ी गई थी फैक्टरी
बीते वर्ष 21 मार्च 2025 को इकदिल थाना क्षेत्र के चितभवन में एक प्रतिष्ठित कंपनी के प्रतिनिधि की शिकायत पर एक फैक्टरी पकड़ी गई थी। एसडीएम विक्रम राघव की टीम ने छापा मारा तो यहां से फर्जी तरीके से बनाई जा रही तरल यूरिया से भरी पांच बाल्टियों के साथ ही कई प्रतिष्ठित कंपनियों के मार्का लगी 34 बाल्टियाें के साथ ही 96 ढक्कन, 330 स्टीकर भी जब्त किए थे। इसके साथ ही यहां बड़ी मात्रा में इस तरल को बनाने के लिए कच्चा माल व विभिन्न रसायनिक पदार्थ मिले थे।
जल्दबाजी में नहीं कर पाते पहचान
ऑटोमोबाइल से जुड़े जानकार बताते है कि ट्रक को 1000 हजार किमी चलने पर लगभग डेढ़ बाल्टी यानिकी 30 लीटर तरल यूरिया की आवश्यकता होती है। ऐसे में लंबी दूरी तय करने वाले ट्रक चालक नेशनल हाईवे पर सजी दुकानों से तरल यूरिया खरीदकर अपने वाहन में डाल लेते है। नकली बाल्टियों पर लगे कंपनियों के मार्का उन्हें भ्रमित करते है और वह ठगी का शिकार हो जाते है।
ऐसे करें पहचान
शहर के पक्का बाग स्थित ऑटोमाबाइल के एक व्यापारी ने बताया कि तरल यूरिया की बाल्टियों में पहचान के लिए नकली बाल्टी पर लगे स्टीकर में उभार होता है जबकि असली बाल्टी पर कोई उभार नहीं होता। बाल्टी पर हाथ घुमाने से यह पता चल जाता है। इसके साथ ही बाल्टी पर लगे स्कैनर से भी असली नकली की पहचान की जा सकती है।
बाल्टी की तुलनात्मक कीमतें
लीटर बाजार में कीमत हाईवे के किनारे मिल रही
पांच लीटर 400 200 से 250
10 लीटर 700 300 से 350
20 लीटर 1000 से 1300 400 से 500
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वर्जन
इकदिल थाना क्षेत्र में जो नकली तरल यूरिया की फैक्टरी पकड़ी गई है वहां से बड़ी मात्रा में विभिन्न कंपनियों का मार्का लगी खाली और भरी बाल्टियां जब्त की गई थी। हर पहलू पर जांच की जा रही है साथ ही आसपास के जिलों में भी इनका नेटवर्क तलाशा जा रहा है। -अभय नारायण राय, सीओ सिटी
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वर्जन
वाहनों में तरल यूरिया के प्रयोग का मुख्य मकसद प्रदूषण कम करना होता है। इसी वजह से यह बीएस-4 व बीएस-6 वाहनों में डाली जाती है। नकली तरल यूरिया का प्रयोग वाहनों में करने से प्रदूषण घटने के बजाए बढ़ेगा। जल्द ही इस संबंध में जांच की जाएगी। -भुवन प्रकाश, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (फिरोजाबाद)
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वर्जन
तरल यूरिया बेचने वाली दुकानें कृषि विभाग में पंजीकृत नहीं होती है, इसलिए इनका विभाग से सीधा कोई संपर्क नहीं होता। हालांकि बीते वर्ष कुछ शिकायतें मिली थी जिसपर विभागीय टीम ने जांच की थी। जांच के दौरान किसी भी प्रकार की दानेदार यूरिया नहीं मिली थी। इसके साथ ही इन दुकानदारों को पक्के बिल के साथ ही अन्य जरूरी कागजात रखने के निर्देश दिए थे।
ओंकार सिंह, जिला कृषि अधिकारी