आगामी वित्तीय वर्ष से जिले की कुल आबादी के 79.56 फीसदी ग्रामीणों और 64.43 प्रतिशत शहरी वाशिंदों को ही सस्ती दरों पर राशन मुहैया हो सकता है। दरअसल राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 को लागू करने की दिशा में प्रयास शुरू हो गए हैं।
पूर्ति विभाग को वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर एनआईसी लखनऊ से तीन कैटेगरी में आबादी/परिवारों की सूची भी प्राप्त हो गई है। प्रशासन अब इन सूचियों के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। 10 मार्च तक सत्यापन कार्य पूर्ण किया जाना है।
महज गरीबों को रियायती दरों पर खाद्यान्न मुहैया हो, अमीर और साधन संपन्न इसका लाभ न उठा सकें, इसे लेकर जिले में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम को लागू करने की कवायद शुरू हो गई है। आपूर्ति विभाग गरीब परिवारों के सत्यापन का कार्य शुरू करने जा रहा है।
विभाग को ग्रामवार सोशियो इकोनामिक कास्ट सेंशस (सेस) का डाटा एनआईसी लखनऊ से प्राप्त हो चुका है। बीती दो फरवरी को डीएम की अध्यक्षता में सत्यापन कार्य को लेकर चर्चा हो चुकी है। अब 5 फरवरी को इस कार्य से जुड़े सभी अधिकारियों व कर्मचारियाें को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आबादी/परिवार से जुड़ा सेस डाटा तीन कैटेगरी में है। पहली कैटेगरी में वे परिवार शामिल हैं, जो गरीबी के दायरे में आते हैं। उन्हें खाद्य सुरक्षा का लाभ मिलेगा। इसमें सभी अंत्योदय कार्डधारक शामिल होंगे। दूसरी सूची में ऐसे लोग शामिल हैं, जो खाद्य सुरक्षा के दायरे से बाहर है और तीसरी कैटेगरी में अवशेष परिवार शामिल है।
सत्यापन के जरिए इस सूची की हकीकत परखी जाएगी। उसके बाद ही निर्धारित प्रतिशत में खाद्य सुरक्षा के दायरे में आने वालों की सूची तैयार होगी। नगरीय क्षेत्र का डाटा लखनऊ एनआईसी से नहीं भेजा गया है। इसकी सूची पूर्ति विभाग स्वयं तैयार करेगा। जो राशनकार्ड अपडेशन के जरिए ऑनलाइन फीड किए जा रहे हैं।
विभाग इसी सूची को तैयार कर सत्यापन कराएगा। सत्यापन का यह कार्य 10 मार्च तक पूरा करने के निर्देश शासन स्तर से दिए गए हैं। जाहिर है कि अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष से इस राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम को लागू करने की दिशा में कदम उठ चुका है।
सत्यापन से जुड़ा प्रशिक्षण आज
सत्यापन कार्य में एसडीएम, बीडीओ, ईओ, एडीओ, ग्राम पंचायत/ विकास अधिकारियों, लेखपालों, नगरपालिका के कर्मियों को लगाया गया है। इन सभी को 5 फरवरी को विकास भवन में प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिला पूर्ति अधिकारी सत्यवीर सिंह सत्यापनकर्ताओं को ग्रामीण व नगरीय क्षेत्रों के निर्धारित सर्वे प्रपत्र प्रदान करेंगे। इसी प्रपत्र पर परिवारों की माली हालत को दर्ज किया जाएगा। सत्यापन ग्राम पंचायत स्तर पर होगा। जिसमें दो कर्मचारी लगाए जाएंगे।
ऐसे पूरी होगी सत्यापन प्रक्रिया
सत्यापन प्रपत्र में ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के लिए मापदंड निर्धारित किए गए हैं। खाद्य सुरक्षा के दायरे में रहने के लिए 13 बिंदु और इससे बाहर करने के लिए 8 बिंदु शामिल किए गए हैं। दायरे में रहने के लिए कुल 13 बिंदुओं को अधिक से अधिक फॉलो करना होगा। इसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिनियम के दायरे में शामिल लोगों यानि इनक्लूजन सूची तैयार होगी। जो ग्रामीण क्षेत्र में कुल आबादी की 79.56 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र की 64.43 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। इसमें विधवा, विकलांग, मजदूर, अनाथ बच्चों, कुष्ठ, एड्स पीड़ितों आदि को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाएगा।
चयन की यह होंगी शर्तें
ग्रामीण क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा के दायरे में रहने के लिए आयकर दाता न हो, चार पहिया वाहन न हो, पांच एकड़ जमीन नहीं होनी चाहिए, शस्त्र लाइसेंस न हो और 2 लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय नहीं होनी चाहिए। नगरीय क्षेत्र में 100 वर्ग मीटर का आवासीय फ्लैट न हो, 80 वर्ग मीटर का व्यवसायिक कारपेट एरिया न हो, तीन लाख रुपये से अधिक की वार्षिक आमदनी नहीं होनी चाहिए। कुछ शर्तें नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में समान हैं।
ऑनलाइन आवेदन की भी सुविधा
एनआईसी लखनऊ से भेजे गए सेस डाटा में यदि कोई परिवार शामिल नहीं है। ऐसे परिवार का मुखिया ऑनलाइन आवेदन भी कर सकता है। इसके लिए उसे आधारकार्ड, मोबाइल नंबर और बैंक खाता जनसेवा केंद्र या लोकवाणी केंद्र पर देना होगा। ऑनलाइन दर्ज परिवार का डाटा आपूर्ति विभाग को प्राप्त हो जाएगा। जिसका सत्यापन करा लिया जाएगा।