घटते जल स्तर के साथ यमुना घाट पिछले लंबे समय से जल विहीन हैं। घाट पर
यमुना की जलधारा को वापस लाने के लिए प्रदेश की सपा सरकार ने दो करोड़
रूपये की धनराशि स्वीकृत किया और जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को सौंपी। वर्ष
2013-14 में धारा को घाट पर लाने के लिए प्रथम चरण का कार्य शुरू हुआ।
घाट
पर तेजी से सिल्ट सफाई का कार्य हुआ। घाट पर 10 से 15 फुट गहरी खुदाई कर
खाई बना दी गई और सुनवारा गांव के पास बोरियों में बालू भरकर ठोकर भी बनाई
गई। जिससे यमुना की जलधारा मुड़कर घाट पर आ जाए। सिल्ट सफाई से घाट पर बनी
गहरी खाई को यमुना से जोड़ दिया गया।
जिससे पानी घाट पर आ गया, लेकिन कुछ
ही दिन में बनाई गई ठोकर डैमेज हो गई और घाट फिर से जल विहीन हो गया। सिंचाई
विभाग ने वर्ष 2014-15 में दूसरे चरण का काम शुरू किया और गलतियों को
सुधारते हुए पुरानी टूटी ठोकर को ठीक किए जाने के साथ तीन और नई ठोकरें
बनाई।
फिर सिल्ट से की सफाई हुई और यमुना की मुख्य धारा से निकाल कर एक नई
धारा को घाट की ओर लाया गया। इससे एक बार फिर यमुना घाटों पर रौनक आई और
श्रद्घालुओं ने डुबकी लगाना शुरू कर दिया।
मगर जलधारा ज्यादा दिन नहीं
रुकी। अब फिर जलधारा घाट से लगभग सौ मीटर दूर है। वहीं घाट पर शहर से निकले
नाले व यमुना एक्सन प्लांट का पानी भरा है। ऐसे में घाटों की सफाई पर खर्च
करोड़ों रूपये बेमतलब साबित हुए।
कार्तिक पूर्णिमा पर जुटते हैं श्रद्घालु-कार्तिक पूर्णिमा पर शहर के यमुना घाट पर काफी श्रद्घालु स्नान के लिए आते
है। भोर पहर से ही श्रद्घालुओं का आना शुरू हो जाता है और यमुना में डुबकी
लगाकर सूर्यदेव का अर्ध्य देते हैं। घाट पर मेला भी लगता है।
जहां पर लोग
खरीददारी करते हैं, लेकिन इस बार घाट पर यमुना की धारा की जगह कीचड़ युक्त
नाले का पानी होने से श्रद्घालु कहां और कैसे स्नान करेंगे।
यमुना
का जलस्तर काफी गिरा है। जिससे जलधारा घाट से दूर हो गई हैं। वहीं यमुना
में गिरने वाली पॉलीथिन भी एक समस्या है। बहाव न होने के कारण पॉलीथिन
एकत्र होकर यमुना की जलधारा को रोंक दिया है।
जैसे ही जल स्तर में सुधार
आएगा बहाव तेज होने से यह रोंक भी हट जाएगी और फिर से जलधारा घाट से बहेगी।
........दिनेश कुमार पाठक, एई, सिंचाई विभाग तृतीय उप खंड